लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के 11 नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। सोमवार को दिनभर चले राजनीतिक घटनाक्रम और हंगामे के बाद शाम को याचिका दायर की गयी। इसमें चुनाव आयोग के SIR कराने के फैसले को गैरकानूनी घोषित करने और पूरी प्रक्रिया की वैधता की न्यायिक जांच कराने की मांग की गयी है। याचिकाकर्ताओं ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने का भी अनुरोध किया है।

याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निर्णय प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाने के नियम और चुनाव आयोग के डिजिटल डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कई अहम फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी और सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी जांचने की मांग की है कि SIR लागू करने में आयोग ने अपनी वैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप किया या नहीं।
SIR को देशभर में लागू करने के फैसले पर सवाल
याचिका में 24 जून 2025 के आदेश और देशभर में SIR लागू करने की मंजूरी से संबंधित दस्तावेजों का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, जुलाई 2025 में आरटीआई के जरिए संबंधित फाइलें मांगी गयी थीं, लेकिन आयोग ने केवल 24 जून का आदेश उपलब्ध कराया। याचिका में प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के कथित जवाब का हवाला देते हुए कहा गया है कि उस समय देशव्यापी SIR शुरू करने का फैसला नहीं हुआ था। दूसरी ओर, आयोग ने 26 सितंबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति में सर्वसम्मति से मंजूरी मिलने की बात कही थी। ऐसे में याचिकाकर्ताओं ने फैसले से जुड़ी मूल फाइलें तलब करने की मांग की है।
CEC की शक्तियों और फॉर्म-6 में बदलाव पर आपत्ति
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 1995 के टीएन शेषन बनाम भारत संघ फैसले का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को अन्य चुनाव आयुक्तों से अधिक निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े 2023 के कानून की धारा 18 का उल्लेख करते हुए कहा है कि निर्णय जहां संभव हो, सर्वसम्मति से और मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए।
इसके अलावा, जुलाई 2026 में ऑनलाइन फॉर्म-6 में किए गए कथित बदलावों को भी चुनौती दी गयी है। आरोप है कि नए प्रावधानों के तहत आवेदकों से यह बताने को कहा गया कि उनका या उनके रिश्तेदारों का नाम पिछली SIR मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं, जबकि इसके लिए संबंधित नियमों में संशोधन नहीं किया गया। याचिका में 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणी का भी उल्लेख है, जिसके अनुसार अदालत ने संशोधित फॉर्म को मंजूरी नहीं दी थी।
13 करोड़ नामों और EVM की समीक्षा की भी मांग
याचिका में मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने से जुड़े लंबित मामले का भी जिक्र है। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि यह संख्या अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की नहीं, बल्कि प्रारंभिक सूची में अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट के रूप में चिह्नित लोगों की है। याचिकाकर्ताओं ने EVM की तकनीकी संरचना, नीतियों और संचालन प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग भी की है।
याचिका में राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सौगत राय, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, संजय राउत, एमए बेबी और डी. राजा समेत विपक्ष के अन्य नेताओं के नाम शामिल हैं। याचिका दाखिल होने के बाद राहुल गांधी और खड़गे भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। उनके पहुंचने पर सवाल उठा कि जब कानूनी टीम याचिका दायर कर चुकी थी, तो दोनों नेताओं को अदालत क्यों जाना पड़ा। बताया गया कि वे याचिका पर हस्ताक्षर करने के लिए वहां पहुंचे थे।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट






