दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में विपक्षी दलों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाली इस रैली को कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, झामुमो, राजद और समाजवादी पार्टी समेत कई दलों का समर्थन मिला।

रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र तथा संविधान को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति से व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण नहीं, बल्कि देश के नागरिकों के अधिकारों और उनकी आवाज की रक्षा के लिए है। राहुल ने महात्मा गांधी के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश की संपत्ति और संसाधनों पर कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों का प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने अदाणी का नाम लेते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रेलवे, हवाई अड्डों और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों पर कुछ बड़े कारोबारी समूहों का नियंत्रण बढ़ना चिंताजनक है।
‘वोट चोरी’ के लिए कार्रवाई की चेतावनी
राहुल गांधी ने दावा किया कि कथित वोट चोरी के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद से हटना होगा। साथ ही आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की भूमिका के कारण लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हुई है।
उन्होंने RSS पर भी संवैधानिक संस्थाओं में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। राहुल ने कहा कि सीबीआई, ईडी, न्यायपालिका, पुलिस और नौकरशाही जैसी संस्थाएं किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश के नागरिकों की हैं।
कांग्रेस नेता ने किसानों, युवाओं और मजदूरों की समस्याओं का जिक्र करते हुए आर्थिक असमानता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों को कर्ज में राहत मिल जाती है, जबकि छोटे किसानों और गरीब परिवारों को कर्ज नहीं चुका पाने पर सख्ती झेलनी पड़ती है। राहुल ने कहा कि यह रैली किसी एक पार्टी का आंदोलन नहीं, बल्कि संविधान, मताधिकार और लोकतंत्र की रक्षा की सामूहिक लड़ाई है।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट









