मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के विरोध में इंडिया ब्लॉक ने रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली आयोजित की। इसमें कांग्रेस समेत गठबंधन के कई घटक दलों के वरिष्ठ नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।

विपक्ष का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान देशभर में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इससे विशेष रूप से पिछड़े, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय प्रभावित हुए हैं। विपक्ष इसे मताधिकार पर हमला बता रहा है।
रैली में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना और अन्य राज्यों से कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे। आयोजकों ने करीब 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया था। इससे पहले राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत कई नेता खुली बस से मिंटो रोड पहुंचे और वहां से पैदल मार्च करते हुए रामलीला मैदान गए।
इससे एक दिन पहले विपक्ष ने खड़गे के आवास पर सांकेतिक संसद आयोजित की थी। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग प्रस्ताव पारित किया गया।
रैली को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। चार हजार से अधिक पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सशस्त्र बलों की कई कंपनियों को तैनात किया गया। संवेदनशील इलाकों में 200 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई।
इस दौरान NSUI कार्यकर्ताओं ने उंगलिमाल का रूप धारण कर प्रतीकात्मक तलवारों के साथ प्रदर्शन किया। इसके जरिए उन्होंने मतदाताओं के अधिकारों के कथित हनन के खिलाफ विरोध जताया।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों को खारिज किया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में आयोग ने कहा है कि पुनरीक्षण से जुड़े फैसले नियमानुसार और सर्वसम्मति से लिए गए हैं। वहीं, भाजपा ने विपक्ष की रैली को राजनीतिक हताशा बताते हुए आरोपों को भ्रामक करार दिया है।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट









