Tuesday, October 6, 2026
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संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द

by उर्वशी शेखर
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संभल में नवंबर 2024 में हुई हिंसा से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागु की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें अफरोज के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी निरोध आदेश को बरकरार रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति को निवारक हिरासत में रखने के लिए केवल पुलिस हिरासत के दौरान दर्ज कथित कबूलनामे को आधार नहीं बनाया जा सकता। संबंधित अधिकारी को मामले से जुड़ी अन्य परिस्थितियों और उपलब्ध सामग्री पर भी स्वतंत्र रूप से विचार करना आवश्यक है।

पुलिस हिरासत में कथित कबूलनामे पर उठे सवाल

मुल्ला अफरोज पर संभल हिंसा में भूमिका का आरोप लगाया गया था। नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के कोर्ट-निर्देशित सर्वे के दौरान हिंसा भड़की थी। इस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी। पुलिस ने हिंसा के बाद कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी।

अफरोज को घटना के करीब 54 दिन बाद गिरफ्तार किया गया था। उसकी गिरफ्तारी के आधार के रूप में पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे का उल्लेख किया गया। हालांकि बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से उसे जमानत मिल गई।

इसके बाद 13 अक्टूबर 2025 को उसके खिलाफ NSA के तहत निरोध आदेश जारी किया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सरकार की कार्रवाई को बरकरार रखा। इसके बाद अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

सुप्रीम कोर्ट ने NSA कार्रवाई को माना कानून के अनुरूप नहीं

सुप्रीम कोर्ट में अफरोज की ओर से दलील दी गई कि पुलिस हिरासत में कथित रूप से दर्ज किया गया कबूलनामा कानूनन ऐसा आधार नहीं हो सकता, जिसके सहारे निवारक हिरासत का आदेश कायम रखा जाए।

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने NSA के इस्तेमाल और निरोध आदेश की वैधता को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से कई सवाल किए। अदालत ने विशेष रूप से यह परखा कि पुलिस हिरासत में कथित रूप से कही गई बात को किसी व्यक्ति की निवारक हिरासत के लिए कितना महत्व दिया जा सकता है।

मामले पर सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार, 29 सितंबर को सुनाए गए फैसले में अदालत ने अफरोज के खिलाफ NSA के तहत जारी निरोध आदेश को रद्द कर दिया और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया।

यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना

अदालत ने कहा कि मामले में निरोध की शक्ति का उचित तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संभल हिंसा से जुड़े मामलों में NSA के इस्तेमाल और निवारक हिरासत के लिए आवश्यक कानूनी आधार को लेकर चर्चा फिर तेज होने की संभावना है। अदालत के फैसले में यह स्पष्ट किया गया है कि ऐसे मामलों में केवल कथित अतिरिक्त-न्यायिक स्वीकारोक्ति पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है और निरोध आदेश जारी करने वाले अधिकारी को उपलब्ध अन्य परिस्थितियों तथा सामग्री पर भी विचार करना होगा।

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