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चारा घोटाला: 25 साल से फरार आरोपी सत्येंद्र कुमार लखनऊ रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार, रांची लाने की तैयारी

by उर्वशी शेखर
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चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में करीब ढाई दशक से फरार चल रहे सत्येंद्र कुमार को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी ने उसे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रेलवे स्टेशन से पकड़ा। आरोपी के खिलाफ लंबे समय से गिरफ्तारी वारंट जारी था। अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची लाया जा रहा है, जहां संबंधित अदालत में पेश किए जाने के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सीबीआई के मुताबिक, सत्येंद्र कुमार से जुड़े चारा घोटाला मामले में वर्ष 2001 में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इसके बाद वह मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। लगातार गैरहाजिर रहने के कारण उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। इसके बाद से ही जांच एजेंसी उसकी तलाश में जुटी थी।

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करीब 25 वर्षों तक गिरफ्तारी से बचने के बाद अब सीबीआई ने उसे पकड़ने में सफलता हासिल की है। एजेंसी अब उसकी फरारी से जुड़े पहलुओं और मामले में उसकी कथित भूमिका की आगे जांच कर सकती है।

नेपाल से लेकर लखनऊ तक ऐसे पहुंची सीबीआई

आरोपी की तलाश के दौरान सीबीआई ने तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं की मदद ली। जांच में उसकी मौजूदगी नेपाल में होने के संकेत मिले थे। बाद में एजेंसी को जानकारी मिली कि वह नेपाल से भारत लौट आया है। इसके बाद उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाने लगी।

जांच एजेंसी को सूचना मिली कि 22 अक्टूबर 2026 को सत्येंद्र कुमार मध्य प्रदेश के गुना से ट्रेन के जरिए लखनऊ के लिए रवाना हुआ है। इस इनपुट के आधार पर सीबीआई ने उसे रास्ते में पकड़ने की रणनीति तैयार की और विशेष टीम को लखनऊ रेलवे स्टेशन पर तैनात किया।

सीबीआई की टीम ट्रेन के पहुंचने से पहले ही स्टेशन पर मौजूद थी। ट्रेन के लखनऊ पहुंचने के बाद अधिकारियों ने संदिग्ध की पहचान कर उसे हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से मामले से संबंधित जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची लाया जा रहा है। यहां संबंधित अदालत में पेशी के बाद उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार होगी।

पुराने मामले में अब आगे क्या?

चारा घोटाले से जुड़े इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद लंबे समय से लंबित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। सीबीआई अदालत में आरोपी की अनुपस्थिति, उसके खिलाफ जारी वारंट और अब तक की जांच से जुड़े तथ्यों को रख सकती है।

हालांकि, गिरफ्तारी अपने आप में अपराध साबित होने का प्रमाण नहीं है। सत्येंद्र कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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