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झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ निष्पक्षता बरतने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले में बिना उचित जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के सामूहिक आदेश जारी नहीं किए जाएं। सुनवाई से लेकर रिपोर्ट तैयार करने तक हर स्तर पर नियमों का पालन करना होगा।
शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में राज्य के सभी जिलों के निर्वाचन अधिकारियों के साथ नो-मैपिंग, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी और अन्य श्रेणियों के मामलों की सुनवाई की प्रगति पर चर्चा हुई। इसके अलावा फॉर्म-6, 7 और 8 से जुड़े आवेदनों को ECINET पर डिजिटाइज करने की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
26 अक्टूबर की बैठक से पहले काम में तेजी लाने का निर्देश
के. रवि कुमार ने अधिकारियों को सुनवाई के लंबित मामलों के निष्पादन और आवेदनों के डिजिटाइजेशन में तेजी लाने को कहा। उन्होंने बताया कि 26 अक्टूबर को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक होगी, जिसमें SIR-2026 की अद्यतन स्थिति साझा की जाएगी। इसके लिए जिलों को तथ्यात्मक आंकड़ों के साथ तैयार रहने का निर्देश दिया गया है।
फॉर्म-6 के डिजिटाइजेशन की धीमी रफ्तार पर भी उन्होंने चिंता जताई। अधिकारियों को BLO और बूथ लेवल सुपरवाइजरों के काम की नियमित निगरानी करने तथा जिलावार फॉर्म-6 के आठ प्रतिशत डिजिटाइजेशन का लक्ष्य पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। जिन मतदान केंद्रों पर काम पीछे है, वहां संबंधित कर्मियों को अतिरिक्त सहयोग देने का निर्देश दिया गया।
नए मतदाताओं के लिए विशेष कैंप, जनजातीय क्षेत्रों पर जोर
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने नए पात्र मतदाताओं का नाम सूची में जोड़ने के लिए फॉर्म-6 के माध्यम से विशेष शिविर आयोजित करने को कहा। खास तौर पर जनजातीय आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसे कैंप लगाने पर जोर दिया गया। इन शिविरों में लोगों को आवेदन भरने, जरूरी दस्तावेज जुटाने और उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर विवरण का सत्यापन कराने में मदद दी जाएगी।
उन्होंने होम-टू-रोल सत्यापन के लिए अधिकारियों को क्षेत्र में जाकर भौतिक निरीक्षण करने का भी निर्देश दिया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र लोगों को मतदाता सूची में शामिल होने का अवसर मिले और पंजीकरण की प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न हो।
“पात्र मतदाता न छूटें, अपात्र नाम भी शामिल न हों“
के. रवि कुमार ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में समावेशिता और पात्रता, दोनों का ध्यान रखा जाना चाहिए। दूरदराज के गांवों, ग्रामीण एवं जनजातीय इलाकों के साथ दिव्यांगों, वरिष्ठ नागरिकों, प्रवासी मजदूरों, बेघर लोगों और सामाजिक या भौगोलिक रूप से वंचित समूहों तक पहुंच बनाकर उन्हें पंजीकरण और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में सहायता देने को कहा गया।
साथ ही, सूची में दर्ज प्रत्येक नाम की पात्रता का परीक्षण निर्वाचन कानूनों के अनुसार करने का निर्देश दिया गया। किसी भी अपात्र व्यक्ति या विदेशी नागरिक को निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी किए बिना मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने अधिकारियों को आगाह किया कि सुनवाई और रिपोर्टिंग महज औपचारिकता बनकर न रह जाए। प्रत्येक मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों की अलग-अलग जांच के बाद ही नियमानुसार अंतिम आदेश पारित किया जाए। बिना समुचित परीक्षण के एक साथ कई मामलों में आदेश जारी करने से बचने को कहा गया।
बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज कुमार ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार समेत राज्य के सभी जिलों के निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचन कार्य से जुड़े अन्य पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।





