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झारखंड के तेतरियाखाड़ कोलियरी में गोलीबारी, आगजनी और बम विस्फोट के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आरोपी सैफ अंसारी उर्फ मो. सैफ अली उर्फ बबलू की भूमिका से जुड़े कई अहम साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, सैफ कथित तौर पर अमन साहू और सुजीत सिन्हा गिरोह के लिए काम करता था और कोयला कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों तथा ठेकेदारों में भय पैदा कर रंगदारी वसूलने की साजिश में शामिल था। मामले की गंभीरता और जांच एजेंसी की ओर से पेश तथ्यों को देखते हुए विशेष NIA अदालत ने 16 सितंबर को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
यह मामला लातेहार जिले के बालूमाथ थाना कांड संख्या 234/2020 से जुड़ा है। 19 दिसंबर 2020 को दर्ज इस केस में तेतरियाखाड़ कोलियरी में हुई गोलीबारी, वाहनों में आगजनी, विस्फोट और कथित लेवी नेटवर्क की जांच गृह मंत्रालय के निर्देश पर NIA को सौंपी गई थी। एजेंसी ने NIA अधिनियम की धारा 6(5) के साथ धारा 8 के तहत मामले की जांच अपने हाथ में ली।
हमले से एक दिन पहले तैयार की गई थी योजना
NIA के मुताबिक, कोलियरी पर हमले की तैयारी 17 दिसंबर 2020 से शुरू हो गई थी। सैफ अंसारी अपने कथित सहयोगियों अजय तुरी और पंकज करमाली के साथ धोटी गांव पहुंचा था। वहां हथियारबंद सदस्यों के साथ हमले की योजना तैयार की गई और गिरोह के सदस्य रातभर कोलियरी के आसपास मौजूद रहे।
अगले दिन, 18 दिसंबर की शाम करीब सात बजे, सैफ कथित तौर पर प्रदीप गंझू, शाहरुख अंसारी और अन्य साथियों के साथ तेतरियाखाड़ चेकपोस्ट नंबर-1 पहुंचा। जांच एजेंसी का आरोप है कि वहां पहुंचते ही गिरोह ने गोलीबारी शुरू कर दी। इस घटना में चार नागरिक गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए।
चार ट्रक और एक बाइक में लगाई गई आग
NIA के अनुसार, हमले के दौरान दहशत फैलाने के उद्देश्य से चार ट्रकों और एक मोटरसाइकिल को आग के हवाले कर दिया गया। घटनास्थल पर बम विस्फोट भी किए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि गिरोह के सदस्यों ने भागने से पहले अमन साहू और सुजीत सिन्हा के नाम वाले धमकी भरे पर्चे छोड़े, जिनके जरिए लेवी और रंगदारी की मांग से जुड़ा संदेश देने की कोशिश की गई।
एजेंसी के मुताबिक, वारदात के बाद सैफ ने हथियार गिरोह के प्रमुख सदस्यों को सौंप दिए और खुद छिप गया।
दूसरे हमले की तैयारी का भी आरोप
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि तेतरियाखाड़ की घटना के बाद सैफ कथित तौर पर एक अन्य लक्षित हमले की तैयारी कर रहा था। NIA के अनुसार, अमन साहू के निर्देश पर इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा था।
आरोप है कि सैफ ने कानभीटा गांव में वसीम अंसारी से एक कार्बाइन, एक ऑटोमैटिक पिस्टल और बड़ी संख्या में कारतूस हासिल किए थे। हालांकि, दूसरे हमले को अंजाम देने से पहले बड़कागांव पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से कार्बाइन और कारतूस बरामद किए थे।
गवाहों की पहचान और मोबाइल फोन की जांच का हवाला
NIA ने अदालत में सैफ के खिलाफ गवाहों और तकनीकी साक्ष्यों का भी उल्लेख किया। एजेंसी के मुताबिक, चार संरक्षित गवाहों ने तस्वीरों के जरिए उसकी पहचान तेतरियाखाड़ चेकपोस्ट पर गोलीबारी करने वाले आरोपी के रूप में की।
इसके अलावा, जब्त मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच और कॉल रिकॉर्ड से गिरोह के सदस्यों के साथ उसके संपर्कों के संकेत मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि सैफ जेल में बंद अमन साहू और अन्य सदस्यों के संपर्क में रहकर हमलों की योजना बनाने में शामिल था।
NIA की ओर से अदालत में पेश किए गए इन्हीं तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर सैफ अंसारी की जमानत याचिका खारिज की गई। मामला कोयला कारोबार से जुड़े कथित रंगदारी नेटवर्क और संगठित आपराधिक गतिविधियों की जांच के लिहाज से अहम बना हुआ है।






