बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हिंदी सिनेमा के लिए एक गहरी क्षति है। अपने बेबाक अंदाज, सशक्त संवाद अदायगी और प्रभावशाली अभिनय से उन्होंने दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई। उन्होंने पर्दे पर जिस तरह हर किरदार में जान फूंकी, उसी तरह निजी जीवन में भी उनकी सोच और स्पष्टवादिता चर्चा में रही।
नाना अपनी जिंदगी को लेकर बेहद सहज नजरिया रखते थे। वर्ष 2023 में फिल्म ‘द वैक्सीन वॉर’ के प्रचार के दौरान उन्होंने अपनी मृत्यु और अंतिम संस्कार को लेकर भी खुलकर बात की थी। उस बातचीत में उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपने लिए अंतिम संस्कार की लकड़ियों का इंतजाम पहले से कर रखा है और उनकी इच्छा है कि उनका अंतिम संस्कार उसी से किया जाए।
उन्होंने खास तौर पर गीली लकड़ियों के इस्तेमाल से बचने की बात कही थी। उनका कहना था कि गीली लकड़ी जलने पर अधिक धुआं करेगी और लोगों की आंखों में पानी आ जाएगा। इसी संदर्भ में उन्होंने भावुक माहौल बनाने से भी बचने की इच्छा जताई थी। नाना का कहना था कि उनकी मौत पर लोग उनके लिए न रोएं और उनकी तस्वीर पर श्रद्धांजलि के तौर पर माला भी न चढ़ाएं।
अभिनेता ने उस समय यह भी बताया था कि उनके माता-पिता और भाई-बहनों का पहले ही निधन हो चुका है। खुद को परिवार में बचा हुआ अंतिम सदस्य बताते हुए उन्होंने मृत्यु को अपने दिवंगत परिजनों से दोबारा मिलने के रूप में देखने की बात कही थी। अब उनके निधन के बाद वर्षों पहले कही गई ये बातें और भी भावुक कर देने वाली हो गई हैं।

बताया गया है कि नाना पाटेकर की इच्छा के अनुरूप उनका अंतिम संस्कार पुणे स्थित उनके फार्म हाउस में किया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार की ओर से उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
हर किरदार में छोड़ी अमिट छापनाना पाटेकर का फिल्मी सफर कई दशकों तक प्रभावशाली भूमिकाओं से भरा रहा। ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘वेलकम’, ‘अपहरण’ और ‘राजनीति’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग रंग के किरदार निभाए।
गंभीर भूमिकाओं से लेकर खलनायक और हास्य किरदारों तक, नाना ने हर शैली में अपनी अलग छाप छोड़ी। उनकी संवाद अदायगी और अभिनय की तीव्रता ने उन्हें उन कलाकारों में शामिल किया, जिन्हें पर्दे पर देखते ही दर्शकों का ध्यान उनकी ओर खिंच जाता था। उनका निधन सिनेमा जगत के साथ-साथ उन लाखों प्रशंसकों के लिए भी भावुक क्षण है, जिन्होंने उनके अभिनय को वर्षों तक सराहा।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट