Tuesday, October 6, 2026
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झारखंड में राजस्व संग्रह लक्ष्य से पीछे, वित्त मंत्री ने जताई नाराज़गी

निर्धारित लक्ष्य की तुलना में अब तक कम राजस्व जुटने पर वित्त मंत्री ने अधिकारियों को संग्रह बढ़ाने और कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए हैं।

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में राजस्व संग्रह की मौजूदा स्थिति पर वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने नाराजगी जताई है। निर्धारित लक्ष्य की तुलना में अब तक कम राजस्व जुटने पर उन्होंने अधिकारियों को संग्रह बढ़ाने और कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए हैं।

विभागीय समीक्षा के दौरान सामने आया कि 41 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले राज्य अब तक 34.05 प्रतिशत राजस्व ही जुटा पाया है। इस प्रदर्शन को वित्त मंत्री ने संतोषजनक नहीं माना। उन्होंने अधिकारियों से राजस्व वसूली की गति बढ़ाने के साथ-साथ संभावित कर चोरी के मामलों की पहचान कर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

46 हजार करोड़ राजस्व जुटाने का लक्ष्य

वित्त मंत्री ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के लिए सरकार ने करीब 46,000 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभाग को मौजूदा स्रोतों से बेहतर वसूली के साथ राजस्व के नए माध्यम तलाशने पर भी ध्यान देना होगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों से राजस्व प्राप्ति की संभावनाएं हैं, उनका आकलन कर नए स्रोत विकसित किए जाएं। साथ ही मौजूदा राजस्व स्रोतों में किसी तरह की लापरवाही या कमी को दूर करने की दिशा में भी काम किया जाए।

GST Rationalisation से 4 हजार करोड़ नुकसान का अनुमान

राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि GST Rationalisation के कारण राज्य के राजस्व पर असर पड़ने की आशंका है। उनके अनुसार, इससे झारखंड को करीब 4,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है। ऐसे में इस संभावित कमी की भरपाई के लिए अन्य स्रोतों से राजस्व बढ़ाने की आवश्यकता और बढ़ गई है।

वित्त मंत्री ने MMDR के प्रावधानों से राज्य को होने वाले राजस्व नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि इसके कारण झारखंड को हर साल करीब 14,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने की बात सामने आती है।

दिसंबर की समीक्षा में प्रदर्शन पर नजर

वित्त मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संकेत दिया कि राजस्व संग्रह के प्रदर्शन की अगली महत्वपूर्ण समीक्षा दिसंबर में होगी। उन्होंने कहा कि यदि उस समय तक प्रदर्शन में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो सकती है।

सरकार का फोकस अब राजस्व संग्रह बढ़ाने, टैक्स चोरी रोकने और नए राजस्व स्रोत विकसित करने पर है, ताकि चालू वित्तीय वर्ष के निर्धारित लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

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