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झारखंड में डॉक्टरों की चेतावनी, मांगें पूरी नहीं हुईं तो 22 अक्टूबर से कामकाज बंद

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में चिकित्सकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की झारखंड शाखा के नेतृत्व में 13 से 20 अक्टूबर तक डॉक्टर काली पट्टी पहनकर विरोध दर्ज कराएंगे। मांगों पर ठोस पहल नहीं होने पर 22 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार प्रस्तावित है।

आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए 12 अक्टूबर को Google Meet के माध्यम से बैठक हुई। इसमें सरकारी और निजी क्षेत्र के चिकित्सकों तथा विभिन्न चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में आंदोलन को संयुक्त रूप से आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। IMA झारखंड स्टेट ब्रांच, JHASA, AHPI, JDA, JDN और FAIMA समेत कुल 10 संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं।

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चिकित्सकों की प्रमुख मांगें

चिकित्सा संगठनों ने सरकार के समक्ष कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • डॉक्टरों की सुरक्षा: झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन
  • क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट: कानून में व्यावहारिक बदलाव करना
  • करियर प्रगति: DACP के तहत चिकित्सकों को समयबद्ध पदोन्नति और करियर विकास का लाभ देना
  • नियमित नियुक्तियां: स्वास्थ्य सेवाओं में रिक्त पदों पर नियमित बहाली सुनिश्चित करना
  • जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की समस्याएं: उनकी लंबित समस्याओं का समाधान करना
  • दंत चिकित्सकों के लिए DACP: दंत चिकित्सकों को भी DACP का लाभ देना
  • आयुष्मान भारत: योजना से जुड़ी समस्याओं का निराकरण करना
  • सिंगल-विंडो लाइसेंसिंग: स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एकल खिड़की लाइसेंस व्यवस्था लागू करना
  • महिला चिकित्सकों की सुरक्षा: महिला डॉक्टरों की सुरक्षा, गरिमा और सम्मान सुनिश्चित करना

आंदोलन के कार्यक्रम के तहत 14 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इस दौरान चिकित्सक अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन उपायुक्तों को सौंपेंगे। इसके बाद 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की तैयारी

चिकित्सा संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 22 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जा सकता है। हालांकि, आपातकालीन और जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाओं को जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

संगठनों के अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं, बल्कि चिकित्सकों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करना तथा झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाना है। उन्होंने सरकार से बातचीत के माध्यम से मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई करने की अपील की है।

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