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राजधानी में होर्डिंग, पोस्टर और सोशल मीडिया के जरिए चिकित्सकीय सेवाओं का निजी प्रचार करने के मामले में झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल ने सख्ती दिखाई है। काउंसिल ने आठ डॉक्टरों और उनसे जुड़े अस्पतालों व क्लीनिकों को नोटिस जारी कर चिकित्सकीय आचार संहिता का पालन करने का निर्देश दिया है।
काउंसिल के निबंधक-सह-सचिव डॉ. बिमलेश सिंह की ओर से जारी नोटिस में प्रोफेशनल कंडक्ट, एटिकेट एंड एथिक्स रेगुलेशंस, 2002 का उल्लेख किया गया है। इसके तहत डॉक्टरों द्वारा मरीजों को आकर्षित करने के लिए निजी प्रचार और भ्रामक विज्ञापन करने पर रोक है।
IVF सेंटर से लेकर अस्पतालों तक को नोटिस
काउंसिल की कार्रवाई के दायरे में प्रजनन उपचार, स्त्री रोग, त्वचा रोग और आंखों के इलाज से जुड़े संस्थान शामिल हैं। नोटिस पाने वालों में डॉ. सरबजया सिंह और मिराई फर्टिलिटी एंड आईवीएफ सेंटर, डॉ. एसएन यादव, डॉ. अपूर्व रंजन और मां रामप्यारी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल शामिल हैं।
इसके अलावा डॉ. निवेदिता मिश्रा और झारखंड लेप्रोस्कोपी एंड गायनी सेंटर, डॉ. सौम्या सिन्हा और बेला इंटिस, डॉ. निधि निकुंज, डॉ. निशिता अखौरी और फ्रेया आईवीएफ को भी नोटिस जारी किया गया है।
सूची में डॉ. नेहा रानी और स्किन ब्लिस क्लिनिक, डॉ. जावेद अख्तर हुसैन, डॉ. वकार अहमद और लेक व्यू हॉस्पिटल के साथ डॉ. स्वाति सिंह और स्पर्श आई क्लिनिक भी शामिल हैं।
इलाज की गारंटी और भ्रामक दावों पर रोक
चिकित्सकीय नियमों के मुताबिक, मरीजों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए डॉक्टरों का प्रचार करना प्रतिबंधित है। इलाज में 100 प्रतिशत सफलता की गारंटी देना, बिना प्रमाण खुद को सर्वश्रेष्ठ बताना और मरीजों की तस्वीरों का विज्ञापन में इस्तेमाल करना भी नियमों के उल्लंघन के दायरे में आ सकता है।
हालांकि, अस्पताल और क्लीनिक अपनी वेबसाइट पर डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता, विशेषज्ञता, उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं और फीस जैसी तथ्यात्मक जानकारी दे सकते हैं।
चेतावनी से पंजीकरण निलंबन तक की कार्रवाई संभव
काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि चिकित्सकीय आचार नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसमें चेतावनी देने से लेकर चिकित्सकीय पंजीकरण निलंबित करने तक के कदम शामिल हैं।
इस संबंध में सिविल सर्जनों और मेडिकल कॉलेजों को भी जानकारी दी गई है, ताकि चिकित्सकीय संस्थानों और डॉक्टरों को निर्धारित नियमों के प्रति जागरूक किया जा सके।






