Tuesday, October 6, 2026
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DSP अमर कुमार पांडे पर आदिवासी समन्वय समिति ने लगाये आरोप, CM से की स्वतंत्र जांच की मांग

by उर्वशी शेखर
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रांची पुलिस मुख्यालय-1 में तैनात डीएसपी अमर कुमार पांडे को लेकर आदिवासी समन्वय समिति ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से शिकायत की है। समिति ने अधिकारी से जुड़े तबादले, जमीन विवादों में कथित भूमिका और कुछ लोगों के साथ संभावित सांठगांठ के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत समिति के संयोजक लक्ष्मी नारायण मुंडा की ओर से दी गई है।

शिकायत के मुताबिक, अमर कुमार पांडे को फरवरी 2025 में सीनियर डीएसपी रैंक में पदोन्नति मिली थी। इसके बाद मई 2026 में डीएसपी स्तर पर किए गए व्यापक स्थानांतरण के दौरान उन्हें रांची पुलिस मुख्यालय-1 से झारखंड जगुआर भेजे जाने का आदेश हुआ था। समिति का आरोप है कि बाद में प्रभाव और पैरवी के जरिए तबादला रुकवा लिया गया और वह अभी भी रांची मुख्यालय-1 में पदस्थापित हैं।

जमीन मामलों की जांच में भूमिका पर उठे सवाल

समिति ने अगस्त 2025 में रांची में जमीन से जुड़े मामलों की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी का भी उल्लेख किया है। शिकायत में दावा किया गया है कि अमर कुमार पांडे को इस टीम से हटाया गया था। चुटिया इलाके के एक जमीन विवाद में भी अधिकारी पर कथित फर्जीवाड़े और अनियमितता से जुड़े आरोपों की चर्चा किए जाने का दावा पत्र में किया गया है।

हालांकि, शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि इन आरोपों के समर्थन में उनके पास फिलहाल कोई आधिकारिक आरोप पत्र या विभागीय जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है। यानी इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

शिकायत में कांके अंचल से जुड़े कुछ भूमि विवादों की शुरुआती जांच को लेकर भी अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पोस्ट और कुछ यूट्यूब वीडियो में जमीन कारोबारियों के साथ कथित संबंध और उन्हें संरक्षण दिए जाने संबंधी आरोप लगाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

विजिलेंस या CID से जांच की मांग

आदिवासी समन्वय समिति ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि रांची पुलिस मुख्यालय-1 में पदस्थापना के दौरान डीएसपी की भूमिका की विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही उनकी संपत्ति की भी विजिलेंस, CID अथवा किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से समयबद्ध तरीके से जांच कराने की मांग की गई है।

समिति का कहना है कि जांच के दौरान यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारी या पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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