झारखंड के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के स्कूलों में डिजिटल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, शिक्षकों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने और विद्यार्थियों की जरूरत के मुताबिक पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा प्रौद्योगिकी (एडटेक) का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
इस योजना को झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद यूनिसेफ इंडिया के सहयोग से आगे बढ़ा रही है। रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी बेंगलुरु स्थित परामर्श संस्था आईटी फॉर चेंज को दी गई है। संस्था की विशेषज्ञ टीम मौजूदा स्कूली शिक्षा व्यवस्था, तकनीक के वर्तमान इस्तेमाल और डिजिटल माध्यमों को विस्तार देने की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है।
शिक्षकों और विशेषज्ञों से लिया जा रहा फीडबैक
योजना को जमीन की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने के लिए अलग-अलग जिलों में फीडबैक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें सरकारी स्कूलों के शिक्षक, झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) के विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।

बैठकों में यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि स्कूलों में तकनीक का इस्तेमाल किस स्तर तक हो रहा है, शिक्षकों को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और डिजिटल शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए किन संसाधनों व प्रशिक्षण की जरूरत है। शिक्षकों के व्यावहारिक अनुभवों को भी प्रस्तावित रोडमैप में शामिल किया जा रहा है।
AI समेत कई तकनीकों पर रहेगा जोर
प्रस्तावित व्यवस्था में कंप्यूटर और इंटरनेट के साथ टैबलेट, डिजिटल लर्निंग कंटेंट, इंटरैक्टिव व्हाइटबोर्ड और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित टूल्स को भी शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल कक्षाओं को डिजिटल बनाना नहीं, बल्कि तकनीक का इस्तेमाल विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और जरूरत को समझने में भी करना है।
डिजिटल माध्यमों से विद्यार्थियों की प्रगति का नियमित आकलन किया जा सकेगा। इसके आधार पर कमजोर क्षेत्रों की पहचान कर शिक्षण रणनीति में बदलाव किया जा सकेगा। वहीं, शिक्षकों को भी बच्चों के सीखने के स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से नजर रखने में मदद मिलेगी।
सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को एक व्यवस्थित ढांचे के तहत आगे बढ़ाया जा सकेगा और तकनीक का उपयोग केवल उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित न रहकर विद्यार्थी-केंद्रित और परिणाम आधारित शिक्षा का माध्यम बनेगा।