Tuesday, October 6, 2026
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बोरिंग की नई नियमावली पर बोरवेल कारोबारियों का विरोध, शुल्क और अनुमति प्रक्रिया को बताया अव्यावहारिक

by उर्वशी शेखर
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रांची नगर निगम की प्रस्तावित नई बोरिंग नियमावली को लेकर रांची बोरवेल ऑनर एंड एजेंट्स एसोसिएशन ने रविवार को रातू रोड स्थित विशालाक्षी बैंक्वेट हॉल में बैठक की। बैठक में एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने नई व्यवस्था लागू होने के बाद आम लोगों, बोरिंग एजेंटों और वाहन मालिकों पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक भार तथा प्रक्रियागत दिक्कतों पर चिंता जताई।

एसोसिएशन के संरक्षक के.के. गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित नियमों के तहत छोटे व्यास की घरेलू बोरिंग के लिए भी पहले नगर निगम से अनुमति लेना जरूरी होगा। उनके अनुसार, 5,000 वर्गफीट से कम क्षेत्रफल वाले घरेलू भूखंड के लिए 2,500 रुपये और इससे बड़े क्षेत्र के लिए 5,000 रुपये शुल्क प्रस्तावित है। वहीं व्यावसायिक बोरिंग के मामले में 1,000 वर्गफीट तक के क्षेत्र के लिए 5,000 रुपये तथा उससे अधिक क्षेत्र के लिए प्रति वर्गफीट 10 रुपये शुल्क लेने का प्रावधान बताया गया है। एसोसिएशन ने इन दरों को आम नागरिकों के लिए अत्यधिक बताया।

निरीक्षण के बाद अनुमति पर भी सवाल

बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत नगर निगम के अधीक्षण अभियंता या सहायक अभियंता द्वारा स्थल का निरीक्षण किए जाने के बाद ही करीब 4.5 इंच व्यास वाली छोटी बोरिंग की अनुमति मिलेगी। एसोसिएशन का कहना है कि इससे बोरिंग कराने की प्रक्रिया अनावश्यक रूप से जटिल हो सकती है।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे महेश चंद्रा ने कहा कि नियमावली में मकान के लिए होल्डिंग नंबर और खाली जमीन पर बोरिंग के लिए संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की शर्त व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि रांची में ऐसे कई मकान और भूखंड हैं, जहां होल्डिंग नंबर या जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित परिवारों को पेयजल की जरूरत पूरी करने में परेशानी हो सकती है।

बिना रसीद पैसे मांगने का भी आरोप

एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष गगण शर्मा ने आरोप लगाया कि नई नियमावली अभी लागू भी नहीं हुई है, इसके बावजूद कुछ एजेंटों से बिना रसीद पैसे मांगे जाने की शिकायत सामने आई है। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इस संबंध में उच्च स्तर पर शिकायत की जाएगी।

वहीं, एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य सुनील तिवारी ने वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर व्यापक नीति बनाने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि भूजल संरक्षण की जिम्मेदारी केवल नई बोरिंग कराने वाले लोगों तक सीमित क्यों होनी चाहिए। उनका सुझाव था कि सरकार और नगर निगम को सभी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ सड़कों और नालियों के बीच उपलब्ध स्थानों पर भी ऐसे सिस्टम विकसित करने चाहिए, ताकि बारिश के पानी को व्यवस्थित तरीके से जमीन में पहुंचाया जा सके।

CM से लेकर नगर निगम अधिकारियों तक पहुंचेगा प्रतिनिधिमंडल

बैठक में एसोसिएशन ने तय किया कि प्रस्तावित नियमावली को लेकर जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्री, सांसद, विधायक, नगर निगम के महापौर, उपमहापौर, नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त और वार्ड पार्षदों समेत संबंधित अधिकारियों से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से नियमों में संशोधन और उन्हें आम नागरिकों के लिए सरल बनाने का सुझाव दिया जाएगा।

एसोसिएशन अगले सप्ताह उन नागरिकों के साथ भी व्यापक बैठक आयोजित करने की तैयारी कर रही है, जो प्रस्तावित नियमों से प्रभावित हो सकते हैं। संगठन की मांग है कि बोरिंग से संबंधित प्रक्रिया आसान और आर्थिक रूप से वहनीय हो तथा किसी भी दंडात्मक प्रावधान को लागू करने से पहले व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराया जाए। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो, ताकि लोगों को किसी प्रकार के अनौपचारिक या अवैध भुगतान का सामना न करना पड़े।

बैठक में राजेश प्रसाद, विनोद वर्मा, प्रदीप प्रसाद, मो. क्यूम अंसारी, मो. खान, मंटू कुमार, सुजीत तिवारी, मो. आरिफ, मो. रऊफ, जितेंद्र सिंह, अमरदीप सोनी, छोटू चौधरी, जितेंद्र कुमार, दीपू प्रजापति, प्रशांत कुमार, रुपेश कुमार, मनोज कुमार, मयंक राज, संपूर्ण प्रसाद, प्रकाश सिंह, संदीप सिंह, संतोष अस्थाना, मो. रेहान, रवि महली, मो. एजाज अंसारी, मो. तौसीफ, मो. तस्लीम, पिंटू सिंह, दीपक कुमार, अभय चौधरी समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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