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परिसीमन बिल पर केंद्र की मुश्किलें बढ़ीं? दक्षिणी राज्यों के विरोध से बहुमत पर सवाल

by उर्वशी शेखर
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केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक 2026 को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के दावे किए जा रहे हैं। डिजिटल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना पर दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रीय दलों ने आपत्ति जताई है। इस मुद्दे पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू समेत सहयोगी दलों का रुख केंद्र सरकार की रणनीति के लिए अहम माना जा रहा है।

प्रस्तावित योजना के तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 किए जाने की चर्चा है। दक्षिण भारत के कई राज्यों को आशंका है कि यदि परिसीमन में जनसंख्या को प्रमुख आधार बनाया गया, तो अधिक आबादी वाले उत्तरी राज्यों की सीटों में ज्यादा वृद्धि हो सकती है। इससे तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों का संसद में तुलनात्मक प्रतिनिधित्व प्रभावित होने की चिंता जताई जा रही है। इन राज्यों का तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को इसका राजनीतिक नुकसान नहीं होना चाहिए।

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इस मुद्दे पर एनडीए के भीतर सहमति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सहयोगी दलों की आपत्तियों और संसद में जरूरी विशेष बहुमत की चुनौती को देखते हुए सरकार विधेयक पर आगे बढ़ने के फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है। हालांकि, बिल को उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों तक टालने या संसद में पेश नहीं करने के दावों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

विपक्षी इंडिया ब्लॉक के अलावा कुछ क्षेत्रीय दलों के सांसदों की संभावित असहमति भी इस राजनीतिक चर्चा का हिस्सा है। किसी संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए जरूरी बहुमत का गणित सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में सहयोगी दलों का समर्थन जुटाना विधेयक की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

इसी बीच, आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ा मामला भी चर्चा में है। विपक्षी वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया है कि उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया और कुछ को नजरबंद किया गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और चुनाव प्रक्रिया पर किसी अंतरिम रोक से जुड़े दावों की आधिकारिक जानकारी के आधार पर पुष्टि जरूरी है। इस घटनाक्रम को राज्य की सत्तारूढ़ टीडीपी और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के लिए राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, परिसीमन पर दक्षिणी राज्यों की चिंताएं, एनडीए के भीतर संभावित मतभेद और संसद में बहुमत की जरूरत केंद्र सरकार के सामने अहम राजनीतिक सवाल खड़े करते हैं। हालांकि, विधेयक को टालने के फैसले या सहयोगियों के समर्थन वापस लेने जैसे दावों को फिलहाल आधिकारिक पुष्टि के बिना अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

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