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मध्य प्रदेश: नर्मदा में मिले 343 वोटर ID कार्ड, कांग्रेस ने की ज्ञानेश कुमार के खिलाफ FIR की मांग

by उर्वशी शेखर
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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर में रविवार को नर्मदा नदी में तैरते और किनारे पड़े करीब 343 वोटर आईडी कार्ड मिले। इन कार्डों पर इंदौर के तिलक नगर स्थित आस्था प्लेस समेत अन्य पते दर्ज होने की बात सामने आई है। बड़ी संख्या में मतदाता पहचान पत्र मिलने के बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया। कांग्रेस ने इस घटना की जांच कराने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

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कार्ड मिलने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने सभी कार्डों को लेकर मंडलेश्वर थाने पहुंचकर पुलिस से मामले की जांच करने और FIR दर्ज करने की मांग रखी। हालांकि, कार्ड वहां कैसे पहुंचे और उन्हें नदी में किसने छोड़ा, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।

कार्डों पर दर्ज वर्ष को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

खरगोन जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक ने दावा किया कि बरामद कार्डों पर वर्ष 2016 दर्ज है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि डिजिटल वोटर आईडी कार्ड की शुरुआत 2021 में हुई, तो इन कार्डों पर 2016 की तारीख कैसे दर्ज है।

नाईक के मुताबिक, कार्डों पर मौजूद EPIC नंबर के जरिए संबंधित मतदाताओं और कार्डों की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने मांग की कि इन नंबरों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कार्ड किन लोगों के हैं और वे महेश्वर तक कैसे पहुंचे।

वोटर आईडी कार्ड मिलने पर निष्पक्ष जांच की मांग

कांग्रेस ने इतनी बड़ी संख्या में मतदाता पहचान पत्र मिलने पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई कि यह मामला कथित वोट चोरी से जुड़ा हो सकता है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि कार्डों को नष्ट करने की कोशिश की गई हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए अभी जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

रवि नाईक ने सवाल किया कि इंदौर के पते वाले कार्ड महेश्वर और मंडलेश्वर क्षेत्र तक कैसे पहुंचे, इन्हें वहां कौन लेकर आया और नदी में फेंकने के पीछे क्या कारण था। कांग्रेस ने इन सभी बिंदुओं की जांच कर तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है।

प्रशासन जुटा रहा संबंधित जानकारी

सीडीपीओ श्वेता शुक्ला के अनुसार, मामले में संबंधित चुनाव कार्यालय और इंदौर प्रशासन से पत्राचार कर जानकारी जुटाई जा रही है। इस प्रक्रिया के जरिए कार्डों से जुड़े तथ्यों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

फिलहाल, बरामद कार्डों के स्रोत, उन पर दर्ज विवरण और उनके नदी तक पहुंचने की परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक तौर पर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारियों की जांच और सत्यापित तथ्यों का इंतजार है।

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