झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के मामले में जेल में बंद मोहम्मद उस्मान की जमानत याचिका पर रांची स्थित CID की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई में अदालत ने जांच एजेंसी को केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में CID ने केस डायरी अदालत में जमा कर दी है।
अदालत अब केस डायरी में दर्ज तथ्यों और जांच से जुड़े दस्तावेजों का अवलोकन करेगी। इसके बाद 13 अक्टूबर को उस्मान की जमानत याचिका पर अगली सुनवाई होगी।
आधिकारिक घोषणा से पहले मिली थी आंसर की
CID की जांच में अब तक सामने आए तथ्यों के मुताबिक, JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

जांच एजेंसी का दावा है कि 26 मई 2026 को आधिकारिक तौर पर उत्तर कुंजी जारी होने से पहले ही श्वेता गुप्ता ने अपने मोबाइल नंबर 8809436753 से TDPL के कर्मचारी मोहम्मद उस्मान को व्हाट्सएप के जरिए आंसर की भेजी थी।
जांच के अनुसार, उस्मान को प्राप्त उत्तर कुंजी आगे अभ्यर्थियों तक पहुंचाई गई। CID इस कड़ी को परीक्षा में कथित अनियमितता और पेपर से जुड़ी गोपनीय जानकारी के प्रसार से जोड़कर देख रही है।
अब अदालत में जमा की गई केस डायरी में जांच एजेंसी ने इस मामले से जुड़े साक्ष्यों और आरोपों का क्या आधार बताया है, इसका अवलोकन जमानत पर होने वाली अगली सुनवाई में महत्वपूर्ण होगा।