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रांची में JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के प्रदर्शन के दौरान एक महिला के साथ कथित अभद्रता और मारपीट के मामले में आरोपियों को अदालत से राहत नहीं मिली है। पुलिस की ओर से केस डायरी में प्रस्तुत गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तथ्यों पर विचार करने के बाद सिविल कोर्ट ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। इस मामले में चंडी तिवारी, पीयूष कुमार सिंह उर्फ पीयूष और रवींद्र कुमार पासवान उर्फ रवींद्र पासवान समेत अन्य लोगों को नामजद किया गया है।
कोतवाली थाने में दर्ज है प्राथमिकी
यह मामला 21 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने के दौरान हुई घटना से जुड़ा है। पीड़िता ने रांची के कोतवाली थाने में कांड संख्या 182/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें प्रदर्शन के दौरान उसके साथ बदसलूकी और मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद नामजद आरोपियों ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए सिविल कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, पुलिस की केस डायरी में दर्ज तथ्यों और साक्ष्यों को देखने के बाद अदालत ने उनकी याचिकाएं स्वीकार नहीं कीं।
गवाहों के बयान में भी घटना का जिक्र
पुलिस की केस डायरी के पैरा 3 और 4 में दर्ज बयानों के अनुसार, प्रदर्शनकारी जब जुलूस के रूप में फिरायालाल चौक की ओर बढ़ रहे थे, उसी दौरान पीड़िता को कथित तौर पर घेर लिया गया। आरोप है कि उसके कपड़े उतारने की कोशिश की गई और उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
वहीं, केस डायरी के पैरा 24 और 25 में शामिल स्वतंत्र गवाहों के बयान भी पुलिस ने अदालत के समक्ष रखे। इन बयानों में चडरी तालाब के पास भीड़ द्वारा महिला के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी किए जाने की बात सामने आई है।
मेडिकल रिपोर्ट में चोटों की पुष्टि
मामले में पुलिस ने पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर पेश किया। रिपोर्ट में उसके बाएं हाथ समेत शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान मिलने की पुष्टि की गई है। पुलिस ने इन चोटों को घटना के दौरान कथित मारपीट से जुड़ा साक्ष्य बताया।
केस डायरी में यह भी उल्लेख है कि पीड़िता के शोर मचाने के बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और उसे भीड़ से सुरक्षित निकाला। इन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।





