झारखंड हाईकोर्ट ने कल्याण विभाग के 13 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति के मामले में राहत देते हुए राज्य सरकार के पुराने फैसले को निरस्त कर दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित कर्मचारियों के दस्तावेजों और पात्रता की जांच की जाए। निर्धारित मानदंड पूरे होने पर उन्हें आठ सप्ताह के भीतर वर्ग-तीन के पदों पर पदोन्नति दी जाए।

यह मामला रामवतार सिंह मुंडा समेत 13 कर्मचारियों की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने 30 अक्टूबर 2020 को जारी विभागीय आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश के जरिए उनकी पदोन्नति की मांग खारिज कर दी गई थी। विभाग का कहना था कि वर्ग-चार से वर्ग-तीन में नियुक्ति के लिए सीमित प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है और इसके लिए कर्मचारी चयन आयोग को अधियाचना भी भेजी गई है। ऐसे में कर्मचारियों को आयोग की ओर से जारी होने वाले विज्ञापन के तहत आवेदन करना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि विभाग में पहले भी इसी तरह के मामलों में पदोन्नति दी जा चुकी है। वर्ष 2012 में समान योग्यता रखने वाले कर्मचारियों को बिना सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के ही वर्ग-तीन में प्रमोशन मिला था। इसके अलावा टाइपिस्ट, आवासीय विद्यालयों और प्रखंड कल्याण कार्यालयों में कई पद खाली होने की बात भी अदालत के समक्ष रखी गई।
परीक्षा में देरी के कारण कर्मचारियों को नहीं रोक सकते प्रमोशन से
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वर्ष 2010 में पदोन्नति से संबंधित नियम बनाए जाने के बावजूद लंबे समय तक सीमित प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित नहीं की गई। इस परीक्षा की रूपरेखा भी 17 मार्च को सामने आई। वहीं, वर्ष 2019 में आयोग को अधियाचना भेजे जाने के बाद भी परीक्षा नहीं हो सकी।
अदालत ने माना कि विभागीय प्रक्रिया में लंबी देरी के कारण कर्मचारियों को पदोन्नति के अवसर से वंचित रखना उचित नहीं है। खासकर तब, जब विभाग पहले समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को बिना परीक्षा के प्रमोशन दे चुका है। ऐसे में मौजूदा याचिकाकर्ताओं के साथ अलग व्यवहार करने का ठोस आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि सभी 13 कर्मचारियों के रिकॉर्ड का सत्यापन कर उनकी पात्रता सुनिश्चित की जाए। यदि वे अन्य निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं, तो उन्हें सीमित प्रतियोगिता परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता से छूट देकर आठ सप्ताह के अंदर पदोन्नति का औपचारिक आदेश जारी किया जाए।









