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जेलों में रिक्त पदों पर भर्ती में देरी, गृह सचिव के खिलाफ अवमानना की सुनवाई 7 दिसंबर तक टली

by उर्वशी शेखर
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झारखंड की जेलों में खाली पदों पर नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की खंडपीठ ने गृह सचिव के खिलाफ चल रही अवमानना की कार्रवाई को 7 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि इस तारीख तक पूर्व में जारी आदेश का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शो-कॉज दाखिल कर बताया कि असिस्टेंट जेलर और जेल वार्डन की नियुक्ति के लिए अलग-अलग जोन में शारीरिक दक्षता परीक्षा की तिथियां तय कर दी गई हैं। सरकार ने प्रक्रिया जल्द पूरी करने की जानकारी दी, लेकिन अदालत इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने भी पक्ष रखा।

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दरअसल, हाईकोर्ट ने 1 अप्रैल को राज्य सरकार और संबंधित भर्ती आयोगों को जेलों में रिक्त पदों पर छह महीने के भीतर नियुक्तियां पूरी करने का निर्देश दिया था। निर्धारित समय में आदेश का अनुपालन नहीं होने और बार-बार अतिरिक्त समय मांगे जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई थी।

पिछली सुनवाई में खंडपीठ ने गृह सचिव वंदना दादेल और JSSC सचिव सुधीर कुमार गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए। दोनों अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश भी दिया गया था।

यह मामला झारखंड हाईकोर्ट की ओर से जेल सुधार और मॉडल जेल मैनुअल के क्रियान्वयन को लेकर स्वतः संज्ञान में शुरू की गई सुनवाई से जुड़ा है। अब अदालत ने सरकार को 7 दिसंबर तक आदेश के अनुपालन का अवसर दिया है। निर्धारित समय में भर्ती प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ती है, इस पर अगली सुनवाई में नजर रहेगी।

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