Tuesday, October 6, 2026
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रांची जुलूस-पथराव मामले में कोर्ट का फैसला, 5 दोषियों को 2-2 साल तक की सजा

by उर्वशी शेखर
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रांची के डेली मार्केट थाना क्षेत्र में 10 जून 2022 को हुए जुलूस, पथराव और पुलिसकर्मियों पर हमले के मामले में अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (JMFC) ऋत्विका सिंह की अदालत ने मो. उस्मान उर्फ करण, मो. तवारू उर्फ तबारक कुरैशी, मो. सरफराज आलम, मो. साबिर अंसारी और मो. अफसर उर्फ अफसर आलम को अलग-अलग धाराओं में दोषी मानते हुए अधिकतम दो वर्ष की साधारण कैद और करीब 10 हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा सुनाई है।

अदालत के आदेश के मुताबिक, निर्धारित जुर्माना नहीं चुकाने पर दोषियों को अतिरिक्त 30 दिनों की सजा भुगतनी होगी। वहीं, अदालत ने आरोपियों को प्रोबेशन का लाभ भी नहीं दिया। केस डायरी में पुलिस की ओर से आरोपियों के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड का उल्लेख किए जाने को इसके प्रमुख आधारों में शामिल किया गया।

10 गवाहों के बयान बने अभियोजन का आधार

मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने आरोपों के समर्थन में कुल 10 गवाह पेश किए। इनमें पुलिसकर्मी, तत्कालीन थाना प्रभारी और स्वतंत्र गवाह शामिल थे। दो स्वतंत्र गवाह कपिल प्रसाद साहू और अजय कुमार साहू अदालत में अपने पूर्व बयानों से पलट गए। हालांकि अभियोजन पक्ष के अनुसार अन्य गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का आरोपियों की ओर से प्रभावी खंडन नहीं किया जा सका।

कांस्टेबल नरेश कुमार उर्फ नरेश साव ने अपने बयान में घटना के दौरान पथराव और फायरिंग की बात कही तथा पुलिसकर्मियों के घायल होने का जिक्र किया। मामले के सूचक सुमित कुमार भगत ने एफआईआर दर्ज कराने और घटनास्थल पर मौजूद रहने की जानकारी अदालत को दी।

तत्कालीन डेली मार्केट थाना प्रभारी अवधेश ठाकुर ने बताया कि पथराव के दौरान उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी और वे कुछ समय के लिए बेहोश हो गए थे। ड्राइवर कांस्टेबल कृष्णा कुमार मेहता भी गश्ती दल के साथ मौके पर मौजूद थे और उन्होंने घटना को लेकर अपना बयान दर्ज कराया।

QRT से जुड़े चितरंजन गगन और पंकज कुमार महतो ने भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिस की कार्रवाई और घटनाक्रम के संबंध में गवाही दी। वहीं, तत्कालीन चुटिया थाना प्रभारी वेंकटेश कुमार ने उर्दू लाइब्रेरी और सुजाता चौक के आसपास की स्थिति की जानकारी दी। हिंदपीढ़ी के तत्कालीन थाना प्रभारी विनय कुमार सिंह ने एकरा मस्जिद के आसपास भीड़ जुटने और जुलूस से जुड़ी शुरुआती परिस्थितियों के बारे में अदालत को बताया।

क्या है पूरा मामला?

अभियोजन के अनुसार, 10 जून 2022 को दोपहर करीब 2 बजे नूपुर शर्मा के विवादित बयान के विरोध में एकरा मस्जिद से फिरायालाल चौक की दिशा में बड़ी संख्या में लोग जुलूस के रूप में निकले थे। पुलिस के मुताबिक, भीड़ की संख्या करीब 8 से 10 हजार के बीच थी और जुलूस के लिए प्रशासनिक अनुमति नहीं ली गई थी।

पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से भीड़ से जुलूस रोकने और वापस लौटने की अपील की। आरोप है कि इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और पुलिस बल के साथ धक्का-मुक्की, नारेबाजी तथा पथराव शुरू हो गया। घटनाक्रम में कई पुलिस अधिकारियों और जवानों के घायल होने की बात सामने आई थी।

इस मामले में सुमित कुमार भगत की लिखित शिकायत के आधार पर डेली मार्केट थाना में कांड संख्या 16/2022 दर्ज किया गया था। जांच के दौरान घटनास्थल पर तैनात पुलिस अधिकारियों और जवानों के बयान दर्ज किए गए। अदालत में अभियोजन ने इन्हीं गवाहियों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित करने का प्रयास किया।

अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और केस डायरी में दर्ज तथ्यों पर विचार करने के बाद पांचों आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। फैसले के बाद अब इस मामले में अदालत की ओर से सुनाई गई सजा और उसके आधार चर्चा में हैं।

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