बेटे को डॉक्टर बनाने का सपना पूरा करने के लिए 70 वर्षीय केपांगा सुनामाझी और उनकी पत्नी नगातालु सुनामाझी ने अपनी जमीन बेच दी। मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए पैसे कम पड़े, तो दोनों ने अपने वृद्धावस्था पेंशन कार्ड भी गिरवी रख दिए। ओडिशा के कंधमाल जिले के इस दंपति का संघर्ष बेटे के भविष्य के लिए उनके त्याग को बयां करता है।
दरिंगबाड़ी प्रखंड के धुसारी गांव के रहने वाले दंपति के बेटे सुशांत सुनामाझी ने NEET परीक्षा पास कर जाजपुर स्थित महाराजा जाजति केशरी सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया है। परिवार को उसकी सफलता पर गर्व है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण आगे की पढ़ाई का खर्च जुटाना मुश्किल हो रहा है।
24 हजार रुपये के लिए गिरवी रखे पेंशन कार्ड
सुशांत के दाखिले के लिए पिता ने गांव के एक साहूकार के पास अपना पेंशन कार्ड 12 हजार रुपये में गिरवी रखा। इतनी ही रकम जुटाने के लिए दूसरा कार्ड स्वयं सहायता समूह की सदस्य अर्फा मांझी के पास रखना पड़ा। इस तरह परिवार ने कुल 24 हजार रुपये जुटाए।
कर्ज चुकाने तक दोनों कार्डों पर मिलने वाली पेंशन की राशि संबंधित लोगों को मिलती रहेगी। इससे बुजुर्ग दंपति को अपनी नियमित आय से भी वंचित रहना पड़ेगा। परिवार जमीन बेचने के अलावा दूसरे स्रोतों से भी कर्ज ले चुका है।
पढ़ाई के खर्च की सता रही चिंता
अर्फा मांझी ने बताया कि परिवार की परेशानी देखते हुए उन्होंने सुशांत के दाखिले के लिए पैसे दिए। वहीं, उसकी मां नगातालु सुनामाझी को बेटे की सफलता की खुशी है, लेकिन कॉलेज की फीस, रहने-खाने और किताबों का खर्च जुटाने की चिंता भी सता रही है।
आर्थिक संकट के बावजूद परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। माता-पिता चाहते हैं कि सुशांत डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों का इलाज करे। अब उसके मेडिकल शिक्षा का सफर जारी रखने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत है।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट





