मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोपों को लेकर शुक्रवार, 23 अक्टूबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन की ओर से आयोजित इस आंदोलन में छात्र, किसान और मजदूर संगठनों के शामिल होने का दावा किया गया है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त करना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है।
इस अभियान से जुड़े प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान नेताओं, वकीलों और अन्य सार्वजनिक हस्तियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। इनमें सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, अभिनेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज, परकला प्रभाकर, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, किसान नेता राकेश टिकैत, AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव के नाम शामिल हैं।
प्रशांत भूषण ने लोगों से की अपील
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने नागरिकों से अपने-अपने शहरों और इलाकों में विरोध दर्ज कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कथित वोट चोरी के मुद्दे पर लोगों से एकजुट होने की अपील करते हुए आंदोलन को लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा बताया है।
मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी दलों तथा नागरिक समाज के कुछ संगठनों की ओर से भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में SIR प्रक्रिया के विरोध को लेकर यह देशव्यापी अभियान चलाया जा रहा है।
क्या है प्रदर्शन का संदेश?
आंदोलन के लिए ‘हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर-मंतर’ का नारा दिया गया है। इसके जरिए आयोजक मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर व्यापक जनभागीदारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि SIR प्रक्रिया रद्द होनी चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद छोड़ देना चाहिए। हालांकि, वोट चोरी और चुनावी अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को आरोपों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए; उनकी पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों का स्वतंत्र सत्यापन जरूरी है।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट





