झारखंड में नक्सल विरोधी अभियानों के बदलते स्वरूप के बीच राज्य पुलिस की विशेष इकाई झारखंड जगुआर (एसटीएफ) को नई सुरक्षा जरूरतों के मुताबिक तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मोर्चा संभालने वाली इस विशेष इकाई की मौजूदा संरचना और जिम्मेदारियों की समीक्षा की जा रही है। पुलिस मुख्यालय अब यह तय करने की तैयारी में है कि आने वाले समय में जगुआर को किन अभियानों में और किस स्वरूप में इस्तेमाल किया जाए।
8 अक्टूबर को होगी उच्चस्तरीय समीक्षा
झारखंड पुलिस मुख्यालय में 8 अक्टूबर को इस संबंध में महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। आईजी अभियान की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली बैठक में झारखंड जगुआर और इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) के पुनर्गठन पर विस्तार से चर्चा होगी। संबंधित अधिकारियों को दोनों बलों से जुड़े पुनर्गठन प्रस्ताव और आवश्यक जानकारी के साथ बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया गया है।
नक्सल अभियान में बदलाव के बाद नई भूमिका की तलाश
झारखंड जगुआर को विशेष तौर पर नक्सल विरोधी कार्रवाई के लिए तैयार किया गया था। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले जंगलों में अभियान, ऑपरेशन की अगुवाई और उच्च जोखिम वाली कार्रवाइयों में इस बल की अहम भूमिका रही है। हालांकि, राज्य में नक्सली गतिविधियों में लगातार आई कमी के बाद सुरक्षा बलों की प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं।इसी वजह से अब जगुआर के मैनपावर, तैनाती व्यवस्था, प्रशिक्षण, संसाधनों और ऑपरेशनल जिम्मेदारियों को नए सिरे से परखने की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रस्तावित पुनर्गठन के जरिए बल को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए अधिक उपयोगी और प्रभावी बनाने पर जोर रहेगा।

आईआरबी की तैनाती और जिम्मेदारियों पर भी चर्चा
बैठक में आईआरबी की वर्तमान व्यवस्था की भी समीक्षा होगी। बदलते सुरक्षा परिदृश्य में विभिन्न पुलिस बलों की जिम्मेदारियों का नए सिरे से निर्धारण, उनकी तैनाती और उपलब्ध जवानों का बेहतर इस्तेमाल बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे।
लूटे और बरामद हथियारों का तैयार होगा रिकॉर्ड
बैठक का एजेंडा केवल बलों के पुनर्गठन तक सीमित नहीं है। नक्सल अभियानों के दौरान पुलिस से लूटे गए तथा नक्सलियों के कब्जे से बरामद हथियारों का समेकित डेटाबेस तैयार करने की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी।
इसके अलावा आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास से जुड़े लंबित मामलों और गिरफ्तार किए गए कुख्यात नक्सलियों के खिलाफ चल रहे मुकदमों में स्पीडी ट्रायल की स्थिति पर भी अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी। इस तरह 8 अक्टूबर की बैठक में एक ओर सुरक्षा बलों के भविष्य की रणनीति तय होगी, वहीं दूसरी ओर पुराने नक्सल मामलों के लंबित पहलुओं को निपटाने की दिशा में भी समीक्षा की जाएगी।