Tuesday, October 6, 2026
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झारखंड के विश्वविद्यालयों में अब परीक्षा-रिजल्ट की देरी पर जवाबदेही तय, 45 दिन में परिणाम जरूरी

by उर्वशी शेखर
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झारखंड के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई, परीक्षा और प्रवेश व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 में परीक्षा कैलेंडर, परिणाम, नामांकन, छात्र शिकायतों और पाठ्येतर गतिविधियों को लेकर स्पष्ट समयसीमा और प्रक्रिया तय की गई है। नए नियमों का उद्देश्य विश्वविद्यालयी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

अधिनियम के अध्याय-VII में विद्यार्थियों से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। सबसे खास बदलाव परीक्षा कार्यक्रम और परिणाम घोषित करने की समयसीमा को लेकर है।

शैक्षणिक वर्ष शुरू होने से पहले जारी होगा परीक्षा कार्यक्रम

अधिनियम की धारा 96 के तहत प्रत्येक विश्वविद्यालय को नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत से पहले अगले वर्ष होने वाली परीक्षाओं का विस्तृत कार्यक्रम तैयार कर प्रकाशित करना होगा। निर्धारित कैलेंडर के मुताबिक परीक्षा आयोजित करना विश्वविद्यालय के लिए अनिवार्य होगा।

यदि किसी वजह से तय कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा नहीं हो पाती है, तो संबंधित अधिकारी को 30 दिनों के भीतर राज्य सरकार को लिखित प्रतिवेदन देना होगा। इसमें परीक्षा में हुई देरी के कारणों को स्पष्ट करना होगा। ऐसे मामलों में राज्य सरकार का निर्णय अंतिम माना जाएगा।

रिजल्ट के लिए 45 दिन की सीमा

परीक्षा परिणाम को लेकर भी अधिनियम में स्पष्ट समयसीमा रखी गई है। धारा 97 के अनुसार अंतिम परीक्षा समाप्त होने के बाद विश्वविद्यालय को यथासंभव 30 दिनों के भीतर परिणाम जारी करने का प्रयास करना होगा।

हालांकि, किसी भी परिस्थिति में रिजल्ट घोषित करने की प्रक्रिया 45 दिनों से आगे नहीं बढ़नी चाहिए। यदि इस अवधि में परिणाम जारी नहीं होता है, तो देरी की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू होगी। परीक्षा नियंत्रक को कुलपति के माध्यम से राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भेजनी होगी, जिसमें देरी के कारणों की जानकारी देनी होगी।

मेरिट और आरक्षण नीति से होगा नामांकन

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में दाखिले की व्यवस्था भी अधिनियम में निर्धारित की गई है। धारा 94 के अनुसार विश्वविद्यालय के विभागों, अंगीभूत कॉलेजों और संबद्ध कॉलेजों में संचालित पाठ्यक्रमों में प्रवेश मेधा के आधार और राज्य सरकार की लागू आरक्षण नीति के अनुरूप किया जाएगा।

प्रवेश प्रक्रिया में मनमानी पर भी रोक लगाने का प्रावधान है। किसी विद्यार्थी का नामांकन बिना उचित आधार के अस्वीकार नहीं किया जा सकेगा। प्रवेश को लेकर विवाद उत्पन्न होने पर विद्यार्थियों के लिए शिकायत दर्ज कराने और समाधान पाने की व्यवस्था भी अधिनियम में की गई है।

एडमिशन विवादों के लिए SGRC

धारा 100 के तहत छात्र शिकायत निवारण समिति यानी Student Grievance Redressal Committee (SGRC) की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से विद्यार्थी प्रवेश और अन्य संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए निर्धारित प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सकेंगे।

खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी खुले चयन का नियम

विश्वविद्यालय या कॉलेज की ओर से खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों अथवा अन्य पाठ्येतर गतिविधियों में प्रतिनिधित्व करने वाले विद्यार्थियों के चयन के लिए भी नियम तय किए गए हैं। धारा 99 के तहत चयन Open Merit Competition के माध्यम से किया जाएगा। यानी प्रतिनिधित्व के लिए प्रतिभा और प्रदर्शन को प्राथमिक आधार बनाया जाएगा तथा किसी अन्य आधार पर चयन नहीं किया जाएगा।

छात्रों के लिए क्या बदलेगा?

नए प्रावधान लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों को परीक्षा और परिणाम की प्रक्रिया निर्धारित समय के भीतर पूरी करने के लिए अधिक जवाबदेह होना पड़ेगा। परीक्षा में देरी होने पर 30 दिनों के भीतर कारण बताना होगा, जबकि रिजल्ट 45 दिनों से ज्यादा लंबित रहने पर परीक्षा नियंत्रक को राज्य सरकार के समक्ष जवाब देना होगा।

इसी तरह प्रवेश में मेरिट और आरक्षण नीति का पालन, मनमाने नामांकन पर रोक तथा शिकायतों के लिए SGRC जैसी व्यवस्थाएं विद्यार्थियों को अधिक स्पष्ट और जवाबदेह प्रणाली उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। कुल मिलाकर, अधिनियम का फोकस विश्वविद्यालयों में समय पर परीक्षा, निर्धारित अवधि में परिणाम, पारदर्शी प्रवेश और छात्रों की शिकायतों के प्रभावी निवारण पर है।

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