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मांजीडीह (जैनामोर) से फुसरो को जोड़ने वाली एमडीआर-077 सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण को लेकर बेरमो में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। करीब 16.05 किलोमीटर लंबी इस सड़क की प्रस्तावित परियोजना को लेकर बेरमो विधायक कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह ने योजना की पहल का श्रेय लेने वाले नेताओं पर सवाल उठाए हैं। विधायक का कहना है कि परियोजना से जुड़े सरकारी पत्राचार और विभागीय कार्रवाई से यह स्पष्ट हो जाता है कि सड़क के लिए पहल किस स्तर से शुरू हुई थी।
विधायक ने दावा किया कि उन्होंने सड़क की खराब स्थिति और उस पर लगातार बढ़ते भारी वाहनों के दबाव को देखते हुए इसे बेहतर बनाने की दिशा में पहल की थी। इसी क्रम में उन्होंने 16 दिसंबर 2024 को पथ निर्माण विभाग के सचिव को पत्र भेजा था। पत्र संख्या KJ/BO/24-25/4066 के माध्यम से उन्होंने मांजीडीह (जैनामोर)-फुसरो लिंक पथ के चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और पुनर्निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन यानी DPR तैयार कराने का अनुरोध किया था।
डिवाइडर और स्ट्रीट लाइट वाली सड़क का दिया था प्रस्ताव
अनूप सिंह के मुताबिक, सड़क की जर्जर हालत के साथ-साथ भारी वाहनों की आवाजाही के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सड़क को आधुनिक स्वरूप देने की सिफारिश की थी। प्रस्ताव में डिवाइडर और स्ट्रीट लाइट की सुविधा के साथ मॉडल सड़क विकसित करने की बात कही गई थी।
विभागीय स्तर पर आगे बढ़ी प्रक्रिया
विधायक के पत्र के बाद पथ निर्माण विभाग में भी इस प्रस्ताव को लेकर कार्रवाई आगे बढ़ी। विभाग के अभियंता प्रमुख ने 25 फरवरी 2025 को मुख्य अभियंता, केंद्रीय निरूपण संगठन, रांची को पत्र जारी किया। ज्ञापांक प०नि०वि०/06-विविध-08/2021-902(S) WE के जरिए DPR तैयार करने से संबंधित आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया।
इसके बाद परियोजना की तकनीकी प्रक्रिया को आगे ले जाने के लिए विभाग ने 3 जून 2025 को संयुक्त निरीक्षण दल का गठन किया। विधायक ने इन्हीं विभागीय दस्तावेजों को आधार बनाते हुए कहा है कि सड़क परियोजना की शुरुआत और उसके बाद हुई कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड सरकारी स्तर पर उपलब्ध है।
‘दस्तावेज बताएंगे किसने की थी पहल’
परियोजना को लेकर जारी राजनीतिक विवाद पर विधायक अनूप सिंह ने बेरमो विधानसभा और गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के लोगों से खुद तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का श्रेय लेने से वास्तविक घटनाक्रम नहीं बदलता। उनके अनुसार, किसी परियोजना के लिए किसने पहल की और उसे आगे बढ़ाने के लिए किस स्तर पर प्रयास हुए, इसका प्रमाण सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद रहता है।
विधायक ने कहा कि मांजीडीह-फुसरो सड़क परियोजना की पूरी प्रक्रिया सरकारी पत्रों में दर्ज है और अब क्षेत्र की जनता ही तय करेगी कि सड़क के लिए वास्तविक पहल किसने की थी और बाद में उसका राजनीतिक श्रेय कौन लेने की कोशिश कर रहा है।