झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्य सचिव एवं JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की जमानत याचिका पर सीआईडी की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। अदालत में बचाव पक्ष और जांच एजेंसी की ओर से दलीलें पूरी हो चुकी हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सुनवाई के दौरान ख्यांग्ते की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मामले में उनके मुवक्किल के खिलाफ प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। उनका कहना था कि जांच के दौरान की गई छापेमारी में भी ऐसा कोई आपत्तिजनक प्रमाण सामने नहीं आया, जिससे उनकी संलिप्तता साबित हो सके। बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी की वैधता पर भी सवाल उठाते हुए इसे गैरकानूनी बताया।

सीआईडी ने एजेंसी चयन में भूमिका का उठाया सवाल
जांच एजेंसी सीआईडी ने जमानत का विरोध करते हुए ख्यांग्ते की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। सीआईडी के अनुसार, परीक्षा आयोजित कराने के लिए टीडीपीएल को जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया में ख्यांग्ते की भूमिका रही थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल थे और इसकी जानकारी ख्यांग्ते को भी थी। इसके बावजूद उन्होंने कथित तौर पर इस संबंध में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।
पिछली सुनवाई के दौरान सीआईडी ने अदालत के समक्ष मामले से संबंधित केस डायरी भी प्रस्तुत की थी। अब दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत के फैसले पर सबकी नजर है।
अभय तिवारी के बयान से बढ़ी मुश्किल
मामले में आरोपी और कथित तौर पर घोटाले के प्रमुख कड़ी माने जा रहे अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान का भी जांच एजेंसी ने उल्लेख किया है। सीआईडी अधिकारियों के समक्ष दिए गए बयान में तिवारी ने कथित तौर पर पूर्व JPSC अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की भूमिका का जिक्र किया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, अभय तिवारी ने परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी के तौर पर टीडीपीएल के चयन की प्रक्रिया में ख्यांग्ते की महत्वपूर्ण भूमिका होने की बात कही है। इसी आधार पर सीआईडी ख्यांग्ते की भूमिका की जांच कर रही है और उनकी जमानत का विरोध कर रही है।
अब अदालत के सुरक्षित फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पूर्व JPSC अध्यक्ष एल ख्यांग्ते को इस मामले में जमानत मिलती है या उनकी न्यायिक हिरासत आगे भी जारी रहती है।