Tuesday, October 6, 2026
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संथाल परगना में कथित घुसपैठ का मुद्दा गरमाया, नेता प्रतिपक्ष ने गृह मंत्री से की कार्रवाई की मांग

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में संथाल परगना क्षेत्र में कथित बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर मामले में केंद्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है। 31 अगस्त को लिखे पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि कथित घुसपैठ के चलते क्षेत्र की जनसांख्यिकी में बदलाव के साथ जमीन पर अवैध कब्जे जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

मरांडी ने अपने पत्र में वर्ष 2019 से 2024 के बीच मतदाता संख्या में हुए बदलाव का हवाला देते हुए संथाल परगना की कई विधानसभा सीटों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने पाकुड़, बरहेट, नाला, दुमका, पोड़ैयाहाट, जामताड़ा और राजमहल सहित विभिन्न क्षेत्रों के मतदाता आंकड़े गृह मंत्री के समक्ष रखे हैं। उनका दावा है कि इन क्षेत्रों में एक विशेष समुदाय के मतदाताओं की संख्या में अपेक्षाकृत तेज वृद्धि दर्ज की गई है।

जमीन कब्जे और फर्जी दस्तावेजों का आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में आरोप लगाया कि संथाल परगना के कुछ इलाकों में सरकारी भूमि, गोचर जमीन और आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसे मामलों में कथित तौर पर फर्जी वंशावली, आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मरांडी ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि राजनीतिक हित और वोट बैंक की राजनीति के चलते कथित रूप से अवैध तरीके से रह रहे लोगों को संरक्षण मिल रहा है।

विशेष जांच और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की मांग

केंद्रीय गृह मंत्री से की गई मांगों में सीमावर्ती जिलों में विशेष जांच अभियान चलाना प्रमुख है। मरांडी ने पुराने खतियान के आधार पर संबंधित लोगों की वंशावली की पड़ताल कराने और मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कराने का आग्रह किया है।

उन्होंने संथाल परगना में डिटेंशन सेंटर स्थापित करने तथा जांच में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान होने पर कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई और निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी रखी है।

इसके साथ ही फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों की पहचान और ऐसे मामलों में कथित तौर पर शामिल सरकारी अधिकारियों या तंत्र की भूमिका की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की गई है। मरांडी का कहना है कि संथाल परगना की जनसांख्यिकी, भूमि अधिकार और दस्तावेजों से जुड़े मामलों की गंभीरता को देखते हुए व्यापक स्तर पर जांच जरूरी है।

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