Wednesday, October 7, 2026
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हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में गलत इंजेक्शन देने से महिला की मौ*त, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

by उर्वशी शेखर
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शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान 36 वर्षीय महिला मालती देवी की मौत के बाद अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन दिए जाने के तुरंत बाद महिला की हालत बिगड़ गई और करीब आधे घंटे के भीतर उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मृतका अपने तीन बच्चों का पालन-पोषण मजदूरी करके करती थीं। उनकी अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

जानकारी के अनुसार, हजारीबाग के जय प्रकाश मार्ग की रहने वाली मालती देवी को अचानक तेज सिरदर्द की शिकायत हुई थी। उनकी 19 वर्षीय बेटी मुस्कान उन्हें इलाज के लिए शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंची। चिकित्सकों ने मालती को अस्पताल के महिला मेडिसिन वार्ड में भर्ती कर लिया।

परिजनों के मुताबिक, भर्ती होने के बाद मालती को सलाइन चढ़ाई गई और शुरुआती उपचार किया गया। हालांकि, रात होते-होते उनकी तकलीफ बढ़ने लगी। करीब 12 बजे सिरदर्द असहनीय होने पर मुस्कान ने ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ से मदद मांगी।

इंजेक्शन लगने के बाद अचानक बिगड़ी हालत, आधे घंटे में मौत

मुस्कान का आरोप है कि मां की तबीयत बिगड़ने की जानकारी देने पर ड्यूटी पर तैनात नर्स ने एक इंजेक्शन लिखकर उसे अस्पताल के बाहर से खरीदकर लाने को कहा। वह तुरंत दवा लेकर अस्पताल पहुंची।

परिजनों के अनुसार, इंजेक्शन दिए जाने के कुछ ही देर बाद मालती देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उनके मुंह से झाग निकलने लगा और देखते ही देखते उनकी स्थिति गंभीर हो गई। आरोप है कि इंजेक्शन लगने के लगभग आधे घंटे के भीतर ही मालती ने दम तोड़ दिया।

परिवार का कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराते समय उन्हें उम्मीद थी कि इलाज के बाद मालती स्वस्थ होकर घर लौट आएंगी, लेकिन उनकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया।

इलाज की पर्ची मांगने पर नर्सिंग स्टाफ पर टालमटोल का आरोप

मालती देवी की मौत के बाद अस्पताल में उस समय विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब उनकी बेटी मुस्कान ने इलाज से संबंधित दस्तावेज और भर्ती की पर्ची मांगी।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल कर्मचारियों ने तत्काल दस्तावेज उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें टालना शुरू कर दिया। मुस्कान के अनुसार, पर्ची मांगने पर कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें ‘सैटिस्फाई कॉपी’ तैयार करके दी जा रही है।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि इसके कुछ देर बाद ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग कर्मचारी कमरे में ताला लगाकर वहां से चले गए। इस घटनाक्रम ने परिजनों की नाराजगी और बढ़ा दी।

अस्पताल अधीक्षक से संपर्क की कोशिश, नहीं मिला जवाब

घटना के संबंध में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए अस्पताल अधीक्षक से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल का जवाब नहीं दिया। ऐसे में इलाज के दौरान महिला की मौत और परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों पर अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी है।

परिजनों ने इंजेक्शन दिए जाने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने और इलाज से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, महिला की मौत का वास्तविक कारण क्या था और उपचार में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मजदूरी करके पाल रही थीं तीन बच्चे, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मालती देवी अपने पति के बिना मजदूरी करके तीन बच्चों की परवरिश कर रही थीं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। उनकी मौत के बाद बच्चों के सामने भरण-पोषण और भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है।

मां को स्वस्थ कराने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंची 19 वर्षीय मुस्कान को अब उनकी मौत के बाद कई अनुत्तरित सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

इस घटना ने अस्पताल में उपचार की प्रक्रिया, आपात स्थिति में मरीजों की देखभाल और चिकित्सा संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मालती देवी को कौन-सा इंजेक्शन दिया गया था, उनकी तबीयत बिगड़ने पर क्या उपचार किया गया और मौत की वास्तविक वजह क्या थी। इन सवालों के जवाब चिकित्सकीय जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

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