झारखंड में JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में विस्तृत सुनवाई हुई। बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) की भर्ती प्रक्रिया और JSSC-CGL समेत अन्य परीक्षाओं के माध्यम से हुई नियुक्तियों से जुड़े मामलों को अदालत ने एक साथ सुना। मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में हुई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आई अनियमितताओं की जांच अभी चल रही है। सरकार की दलील पर अदालत ने जांच में लग रहे समय को लेकर मौखिक रूप से कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यदि जांच तीन साल तक चलती रहेगी, तो अदालत इतने लंबे समय तक उसके पूरा होने की प्रतीक्षा नहीं कर सकती। अदालत ने संकेत दिया कि वह मामले में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अपना आदेश पारित करेगी।

बुधवार को मामले में काफी देर तक दोनों पक्षों की ओर से कानूनी दलीलें रखी गईं। प्रार्थियों की ओर से नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी निर्णय को चुनौती देते हुए विभिन्न बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा गया, जबकि राज्य सरकार ने अपने फैसले और जारी जांच के आधार पर अदालत के समक्ष तर्क पेश किए।
सरकार के रद्दीकरण आदेश पर फिलहाल रोक जारी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूर्व में प्रार्थियों को मिली अंतरिम राहत को जारी रखा। इसका मतलब है कि नियुक्तियों को समाप्त करने संबंधी राज्य सरकार के आदेश पर लगी रोक फिलहाल प्रभावी रहेगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए गुरुवार की तारीख तय की है।प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता एवं पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन के अलावा अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स, कुमार हर्ष, सोनल तिवार और सुभाष रसिक सोरेन समेत अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय ने अदालत के समक्ष दलीलें पेश कीं। JPSC की तरफ से अधिवक्ता संजोय पिपरवाल और उनके सहयोगी प्रिंस कुमार ने पैरवी की। वहीं, हस्तक्षेप याचिका दाखिल करने वाले पक्ष की ओर से अधिवक्ता टी. सिंहदेव ने अपनी दलील रखी।
दरअसल, JPSC और JSSC की अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर सरकार ने कई नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। इन प्रक्रियाओं के माध्यम से पहले ही सरकारी सेवा में नियुक्त हो चुके अधिकारियों और कर्मचारियों ने सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने अब तक उन्हें अंतरिम राहत दी है और सरकारी रद्दीकरण आदेश के अमल पर रोक लगा रखी है। गुरुवार की सुनवाई में मामले की आगे की कानूनी स्थिति और अदालत के रुख पर तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।