झारखंड में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के बीच कानूनी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में दायर आवेदन में झारखंड की वर्ष 2025 की डीजीपी नियुक्ति नियमावली की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले में निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत बताया है।
केंद्र का आरोप है कि राज्य सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए अपनी अलग प्रक्रिया तय करते समय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की निर्धारित भूमिका का पालन नहीं किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि नियमावली को लागू करने से पहले राज्य ने शीर्ष अदालत से आवश्यक अनुमति भी नहीं ली।
केंद्र ने अपने आवेदन में 2025 की इस नियमावली के आधार पर की गई डीजीपी नियुक्तियों पर भी आपत्ति जताई है। उसने अदालत से आग्रह किया है कि इस प्रक्रिया के तहत हुई नियुक्तियों को कानूनन वैध न माना जाए।

दरअसल, देश में पुलिस सुधारों से जुड़े ऐतिहासिक प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति को लेकर एक निर्धारित व्यवस्था तय की थी। केंद्र का तर्क है कि झारखंड की मौजूदा नियमावली उस व्यवस्था से अलग है और इसी वजह से इसकी वैधानिकता पर न्यायिक परीक्षण जरूरी है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब झारखंड में नियमित डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी राज्य से जवाब मांग चुका है। मई 2026 में शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।
अब डीजीपी नियुक्ति नियमावली को लेकर केंद्र की आपत्ति के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2026 को करेगा।