Wednesday, October 7, 2026
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स्कॉलरशिप मंजूर, फिर भी नहीं मिली रकम! झारखंड HC ने दिया 5 अक्टूबर तक भुगतान का आदेश

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झारखंड हाईकोर्ट ने विदेश में उच्च शिक्षा के लिए चयनित एक मेधावी छात्र की छात्रवृत्ति जारी नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जतायी है। छात्र का दाखिला यूनाइटेड किंगडम स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन में हुआ है, लेकिन छात्रवृत्ति की स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक राशि नहीं मिलने से उसकी पढ़ाई पर संकट खड़ा हो गया था। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने झारखंड स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के कार्यकारी निदेशक को पूरी छात्रवृत्ति राशि जारी करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा है कि 39,76,655.20 रुपये की पूरी राशि 5 अक्टूबर 2026 तक छात्र को उपलब्ध करायी जाए। भुगतान नहीं होने की स्थिति में काउंसिल के कार्यकारी निदेशक को अगले दिन यानी 6 अक्टूबर को अदालत में स्वयं उपस्थित होकर इसका कारण बताना होगा।

तीन वर्षीय बीटेक के लिए हुआ है चयन

मामले में याचिकाकर्ता सनत झा का चयन यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन के तीन वर्षीय बीटेक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग (कंप्यूटर साइंस एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम) कार्यक्रम के लिए हुआ है। छात्र ने झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से 9 जुलाई 2024 को जारी संकल्प के आधार पर विदेश में उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति का आवेदन किया था।

याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि छात्र की पात्रता की प्रक्रिया पूरी होने के बाद झारखंड स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल ने 9 सितंबर 2026 को छात्रवृत्ति मंजूर कर दी थी। उसी दिन निर्धारित 39.76 लाख रुपये से अधिक की राशि के भुगतान का आदेश भी जारी किया गया। इसके बावजूद स्वीकृत रकम छात्र के खाते या उसके उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं करायी गयी।

फीस जमा करने की आखिरी तारीख 5 अक्टूबर

छात्र की ओर से अदालत में बताया गया कि यूनिवर्सिटी की फीस जमा करने की मूल समय सीमा 21 सितंबर 2026 थी। छात्र के अनुरोध पर विश्वविद्यालय ने इसे बढ़ाकर 5 अक्टूबर कर दिया। इस बीच छात्र ने संबंधित अधिकारियों से कई बार छात्रवृत्ति की रकम जारी करने की मांग की, लेकिन भुगतान नहीं हो सका।

दाखिले की समय सीमा नजदीक आने और छात्रवृत्ति के अभाव में सीट गंवाने की आशंका के चलते आखिरकार छात्र को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

छात्र के करियर को लेकर अदालत ने जतायी चिंता

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने छात्रवृत्ति स्वीकृत होने के बावजूद रकम रोककर रखने के मामले को गंभीरता से लिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मेधावी छात्र के करियर से जुड़े इस मामले में संबंधित पक्ष की कार्यप्रणाली चिंता पैदा करती है।

अदालत के मुताबिक, सरकारी स्तर पर इस तरह की देरी से न केवल संबंधित छात्र की उच्च शिक्षा प्रभावित हो सकती है, बल्कि उन सरकारी योजनाओं का उद्देश्य भी प्रभावित होता है, जिनके जरिए प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को देश-विदेश में आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल संबंधित अधिकारी को सुधार का एक और मौका दिया है। कार्यकारी निदेशक को 5 अक्टूबर तक पूरी छात्रवृत्ति जारी कर इसकी जानकारी छात्र और राज्य सरकार के अधिवक्ता को देने को कहा गया है।

साथ ही, संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई से पहले इस मामले में प्रति शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं हुआ, तो 6 अक्टूबर को कार्यकारी निदेशक को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर देरी की वजह स्पष्ट करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई भी 6 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।

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