महंगाई के दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने करीब चार साल बाद ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। 7 अक्टूबर को हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया गया। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी है.
RBI का यह फैसला ऐसे समय आया है जब महंगाई केंद्रीय बैंक के तय लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82% रही। यह लगातार तीसरा महीना है जब महंगाई 4% के लक्ष्य से अधिक रही। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ाया है।
होम लोन और पर्सनल लोन पर असर संभव
रेपो रेट बढ़ने से बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है। इसका असर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य कर्ज पर पड़ने की आशंका है। अगर बैंक अपनी ब्याज दरें बढ़ाते हैं तो कर्जदारों की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।

हालांकि, ग्राहकों पर इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक अपनी lending rates में कितनी और कब बढ़ोतरी करते हैं।
RBI ने बदला नीतिगत रुख
महंगाई के बढ़ते जोखिम के बीच RBI ने अपने नीतिगत रुख में भी बदलाव किया है। केंद्रीय बैंक ने ‘neutral’ से ‘calibrated tightening’ की ओर रुख किया है। यानी फिलहाल महंगाई को नियंत्रित करना RBI की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।
रुपये और बाजार की भी चुनौती
महंगाई के अलावा रुपये पर दबाव और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी RBI के लिए चुनौती बनी हुई है। ऊंची ब्याज दरें रुपये और घरेलू वित्तीय परिसंपत्तियों को कुछ सहारा दे सकती हैं, लेकिन रियल एस्टेट और NBFC जैसे ब्याज-निर्भर क्षेत्रों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है।
आगे ब्याज दरों की दिशा महंगाई, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों से तय होगी।