झारखंड सरकार ने बोकारो स्टील लिमिटेड (BSL) के अधिग्रहण क्षेत्र से बाहर पड़ी करीब 800 एकड़ वन भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है। बोकारो वन प्रमंडल ने इसके लिए आरएफपी संख्या 05/2026-27 जारी किया है। आधुनिक ड्रोन और डीजीपीएस तकनीक से होने वाले इस सर्वे का पूरा खर्च बीएसएल उठाएगा।

बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना के लिए 1956 से 1982 के बीच भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चली थी। शुरुआती प्रस्ताव करीब 45 हजार एकड़ का था, जिसमें से 31,287 एकड़ जमीन अधिग्रहित कर बीएसएल को सौंपी गई थी। अब संयंत्र के सक्रिय क्षेत्र से बाहर भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत अधिसूचित भूमि का नए सिरे से आकलन किया जाएगा, ताकि उसकी सीमाओं और वर्तमान उपयोग की स्थिति स्पष्ट हो सके।
डिजिटल मैपिंग से होगा सीमांकन
परियोजना के तहत वन विभाग की अधिसूचनाओं, बीएसएल के अधिग्रहण रिकॉर्ड और राजस्व विभाग के पुराने नक्शों को डिजिटल स्वरूप दिया जाएगा। इसके बाद ड्रोन सर्वे और जीएनएसएस उपकरणों से सटीक नक्शे तैयार किए जाएंगे। जमीन पर आरटीके-डीजीपीएस की मदद से सीमांकन कर निर्धारित स्थानों पर सीमा स्तंभ लगाने के लिए चिह्नांकन भी होगा।
अवैध कब्जों पर रहेगी नजर
सर्वे के दौरान आवासीय और व्यावसायिक निर्माण, चारदीवारी, औद्योगिक कचरा, अवैध खनन या कृषि उपयोग में बदली गई जमीन की पहचान की जाएगी। प्रत्येक मामले में संबंधित प्लॉट और खाता संख्या, अतिक्रमण का प्रकार तथा उपलब्ध विवरण दर्ज होंगे। जियोटैग और समय सहित तस्वीरों व वीडियो के जरिए साक्ष्य भी जुटाए जाएंगे।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर वन भूमि के संरक्षण और संभावित अतिक्रमण के मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। इससे वर्षों से अनुपयोगी पड़ी जमीन का रिकॉर्ड दुरुस्त करने और उसके प्रबंधन में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसी भूखंड पर अंतिम कार्रवाई उपलब्ध दस्तावेजों और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।






