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बिहार के गया में शनिवार सुबह सूर्योदय के साथ ही पितृपक्ष 2026 के श्राद्ध और पिंडदान अनुष्ठानों की औपचारिक शुरुआत हो गई। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के तट पर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया। इसके बाद देवघाट पर पिंडदान की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की गई।
सुबह से ही फल्गु नदी के विभिन्न घाटों और विष्णुपद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लोग पारंपरिक विधि से अपने पितरों की शांति और मोक्ष की कामना करते नजर आए। धार्मिक अनुष्ठानों के चलते विष्णुपद और आसपास के इलाकों में आध्यात्मिक माहौल बना हुआ है।
शुक्रवार से शुरू हो चुका था गया श्राद्ध
त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध की प्रारंभिक प्रक्रिया शुक्रवार को ही पुनपुन और गोदावरी सरोवर में तर्पण के साथ शुरू हो गई थी। शनिवार से गया के प्रमुख पिंडवेदी स्थलों पर श्राद्ध एवं पिंडदान का सिलसिला शुरू हुआ, जो आगामी 15 दिनों तक जारी रहेगा।

पिंडदान और तर्पण के बाद श्रद्धालु विष्णुपद मंदिर पहुंचकर भगवान विष्णु के चरणों के दर्शन कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति की ओर से दर्शन और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं।
विष्णुपद मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार
पितरों की मुक्ति की धार्मिक मान्यता के साथ श्रद्धालु सुबह से ही विष्णुपद मंदिर में दर्शन के लिए कतार में खड़े दिखाई दिए। फल्गु नदी के घाटों से लेकर प्रमुख पिंडवेदी स्थलों तक बड़ी संख्या में लोग धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो रहे हैं।
पितृपक्ष महासंगम का विधिवत उद्घाटन शुक्रवार शाम बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के दर्शन के बाद किया था।
मोक्ष की कामना लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु
धार्मिक मान्यताओं में गया को पिंडदान और श्राद्ध के लिए विशेष महत्व प्राप्त है। इसी आस्था के चलते हर वर्ष देश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग अपने पूर्वजों के निमित्त यहां पहुंचते हैं। अगले पखवाड़े तक गया के फल्गु तट, विष्णुपद मंदिर और अन्य पिंडवेदी क्षेत्रों में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के धार्मिक अनुष्ठान जारी रहेंगे।