JPSC की CDPO समेत विभिन्न परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में एक साथ सुनवाई हुई। सरकार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि जांच में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता के साक्ष्य मिले हैं, इसलिए नियुक्तियां निरस्त करना जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से शुक्रवार को बहस पूरी कर ली गई। उनकी ओर से वरीय अधिवक्ता एवं पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और सुभाष रसिक सोरेन समेत अन्य ने पक्ष रखा। JPSC की ओर से अधिवक्ता संजोय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने पैरवी की।

अदालत ने फिलहाल याचिकाकर्ताओं को मिली अंतरिम राहत जारी रखते हुए नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी आदेश पर लगी रोक बरकरार रखी है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी, जब राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी।
गौरतलब है कि JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को सरकार ने रद्द कर दिया था। इससे प्रभावित कर्मचारियों और अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर इस फैसले को चुनौती दी है।