झारखंड पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। अब जांच केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ठगी से जुड़े पूरे आर्थिक नेटवर्क को खंगाला जाएगा। पुलिस साइबर अपराधियों से जुड़े लोगों, बैंक खातों, लेन-देन और संपत्तियों की कड़ियों को जोड़कर अवैध कमाई के स्रोत और उसके इस्तेमाल का पता लगा रही है।
इसके लिए तकनीकी रूप से दक्ष पुलिसकर्मियों की विशेष टीमों को लगाया गया है। जांच में यह पता किया जा रहा है कि किसी साइबर अपराधी ने अकेले ठगी की या उसके साथ परिवार के सदस्य, दोस्त और अन्य सहयोगी भी जुड़े हैं। ठगी की रकम किन खातों में पहुंची, वहां से किन खातों में भेजी गई और आखिरकार उसका इस्तेमाल कहां हुआ, इसकी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।
बैंक खातों से संपत्तियों तक जांच
पुलिस अब साइबर ठगी के मामलों में रकम के प्रवाह को ट्रैक करने के साथ उससे जुड़ी संपत्तियों की भी पहचान कर रही है। जमीन, मकान, वाहन या अन्य परिसंपत्तियां यदि संदिग्ध धन से खरीदी गई हैं, तो उनके स्रोत की जांच की जा रही है।
देवघर, जामताड़ा, धनबाद और गिरिडीह समेत कई जिलों में बड़े साइबर अपराधियों से जुड़ी संपत्तियों को चिन्हित किया गया है। करीब एक दर्जन अपराधियों की संपत्तियों पर कार्रवाई के लिए न्यायालय से अनुमति मांगी गई है। मंजूरी मिलने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
रिश्तेदार और करीबी भी जांच के दायरे में
पुलिस की पड़ताल केवल आरोपियों के नाम पर दर्ज संपत्तियों तक सीमित नहीं है। उनके परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों की संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। कई लोगों को नोटिस भेजकर संपत्ति और उसमें लगी रकम के स्रोत की जानकारी मांगी गई है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं साइबर ठगी से हासिल धन को रिश्तेदारों या करीबी लोगों के नाम पर निवेश तो नहीं किया गया। संदिग्ध संपत्ति और उसकी आय के स्रोत के बीच असंगति मिलने पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर सकती है।

तैयार होगा साइबर अपराधियों की संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड
आईजी अभियान सह पुलिस प्रवक्ता नरेंद्र सिंह के अनुसार, झारखंड पुलिस साइबर अपराधियों की संपत्तियों का ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। इसमें अपराधियों की चल-अचल संपत्ति के साथ परिवार और करीबी लोगों से जुड़ी संपत्तियों का विवरण भी शामिल किया जाएगा।
इसका मकसद किसी एक मामले की जांच तक सीमित रहना नहीं है। पुलिस चाहती है कि किसी बड़े साइबर अपराधी की पहचान होने पर उसके आर्थिक नेटवर्क, सहयोगियों और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध हो सके।
2026 में 680 आरोपी गिरफ्तार
साइबर अपराध के खिलाफ झारखंड पुलिस की कार्रवाई इस साल भी तेज रही है। जनवरी से जुलाई 2026 तक राज्य में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में 680 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
इस दौरान 811 मोबाइल फोन, 862 सिम कार्ड, 101 एटीएम कार्ड, 60 पासबुक, 22 चेकबुक, नौ लैपटॉप, 23 बाइक और छह चारपहिया वाहन जब्त किए गए। पुलिस ने 23 लाख 29 हजार 750 रुपये नकद भी बरामद किए।
प्रतिबिंब पोर्टल से संदिग्ध नंबरों पर नजर
साइबर अपराध की रोकथाम में प्रतिबिंब वेब पोर्टल का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, जनवरी 2026 से इस माध्यम से साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों की निगरानी की गई और 252 नंबर ब्लॉक किए गए।
इस कार्रवाई से जुड़े मामलों में 336 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हुई, जबकि 545 मोबाइल फोन और 655 सिम कार्ड जब्त किए गए।
झारखंड पुलिस की नई रणनीति का केंद्र अब केवल अपराधी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उसके आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करना है। ठगी की रकम जहां गई और उससे जो संपत्ति बनाई गई, पुलिस वहां तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।