Wednesday, October 7, 2026
Home » TMC की पहचान ‘जोड़ा घास फूल’ पर EC ने लगायी अंतरिम ब्रेक, दोनों गुटों को मिलेगा नया नाम और चिह्न

TMC की पहचान ‘जोड़ा घास फूल’ पर EC ने लगायी अंतरिम ब्रेक, दोनों गुटों को मिलेगा नया नाम और चिह्न

by उर्वशी शेखर
0 comments

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर जारी विवाद अब सीधे चुनावी पहचान तक पहुंच गया है। चुनाव आयोग ने आगामी विधानसभा उपचुनावों को लेकर अंतरिम व्यवस्था लागू करते हुए दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘Flowers & Grass’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है। यह व्यवस्था अंतिम निर्णय आने तक लागू रहेगी।

आयोग के इस फैसले का तत्काल प्रभाव नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के उपचुनाव पर पड़ेगा, जहां 6 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है। दोनों गुटों को अब इन चुनावों में अलग-अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना होगा।

अंतरिम आदेश के तहत चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अपनी पसंद के तीन-तीन नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिह्न प्राथमिकता के क्रम में बताने को कहा है। इसके आधार पर आयोग प्रत्येक गुट के लिए एक अलग नाम और अलग प्रतीक आवंटित करेगा। दोनों पक्ष चाहें तो अपने नए नाम में मूल पार्टी से जुड़ाव का संकेत भी रख सकते हैं, लेकिन अकेले ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

EVM से फिलहाल गायब रहेगा TMC का पारंपरिक निशान

‘Flowers & Grass’ यानी जोड़ा घास फूल लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस की चुनावी पहचान रहा है। लेकिन संगठन पर अधिकार को लेकर दोनों पक्षों के दावे के बीच आयोग ने फिलहाल इस आरक्षित चिह्न को दोनों से अलग कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि नंदीग्राम और रेजीनगर के आगामी उपचुनाव में दोनों गुट इस पारंपरिक चुनाव चिह्न पर दावा नहीं कर पाएंगे। उन्हें आयोग की ओर से अधिसूचित मुक्त प्रतीकों में से अलग-अलग चिह्न दिए जाएंगे।

क्यों आया अंतरिम आदेश?

चुनाव आयोग के सामने पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर दो विरोधी दावे हैं। दोनों पक्ष खुद को तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक प्रतिनिधि बताते हुए पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न पर अधिकार का दावा कर रहे हैं।

आयोग ने माना है कि इस विवाद का अंतिम निपटारा Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैरा 15 के तहत विस्तृत प्रक्रिया के बाद किया जाना है। हालांकि, उपचुनावों की समयसीमा को देखते हुए उस पूरी प्रक्रिया को तत्काल पूरा करना संभव नहीं है। इसलिए फिलहाल दोनों पक्षों को समान स्थिति में रखने के लिए अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है।

उम्मीदवारों के सामने बदली चुनावी पहचान की चुनौती

दोनों गुट पहले ही नंदीग्राम और रेजीनगर में अपने उम्मीदवार उतार चुके हैं। ऐसे में आयोग के फैसले के बाद उनकी चुनावी रणनीति में तत्काल बदलाव की स्थिति पैदा हो गई है। अब उम्मीदवारों को नए नाम और नए प्रतीक के साथ मतदाताओं के बीच जाना होगा।

इस फैसले से उपचुनाव में मतदाताओं के सामने दोनों गुटों की पहचान भी पहले से अलग होगी। चुनाव प्रचार, EVM पर प्रतीक और उम्मीदवारों की राजनीतिक पहचान—तीनों स्तरों पर इस अंतरिम व्यवस्था का असर दिखाई देगा।

अंतिम अधिकार किसे मिलेगा, फैसला अभी बाकी

चुनाव आयोग का मौजूदा आदेश अंतिम फैसला नहीं है। आयोग अभी दोनों पक्षों के संगठनात्मक दावों, दस्तावेजों और अन्य संबंधित पहलुओं पर विचार कर रहा है। अंतिम निर्णय में यह निर्धारित किया जाएगा कि ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘Flowers & Grass’ आरक्षित चुनाव चिह्न पर अधिकार किस पक्ष को मिलता है।

फिलहाल 6 अक्टूबर के नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव इस विवाद की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा बन गए हैं। दोनों गुटों की अगली चुनौती अब अपनी नई चुनावी पहचान तय करना और उसी नाम-चिह्न के साथ मतदाताओं के सामने उतरना है।

You may also like

Leave a Comment