Wednesday, October 7, 2026
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2026 में झारखंड ने पेश किया जल संरक्षण और सिंचाई विस्तार का रोडमैप, केंद्र से मांगा सहयोग

by उर्वशी शेखर
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नई दिल्ली: जल संरक्षण और सिंचाई क्षमता बढ़ाने की दिशा में झारखंड सरकार ने नई दिल्ली में आयोजित जल जीवन मिशन (JJM) Departmental Summit 2026 में राज्य की जल प्रबंधन रणनीति और भविष्य की प्राथमिकताओं का रोडमैप प्रस्तुत किया। सुषमा स्वराज भवन में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र में जल संसाधन विभाग के मंत्री हफीजुल हसन और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने झारखंड का प्रतिनिधित्व किया।

सम्मेलन में झारखंड की ओर से जल संरक्षण, मौजूदा सिंचाई संरचनाओं के बेहतर उपयोग और जल परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि झारखंड में करीब 30 प्रतिशत वन क्षेत्र और पठारी भू-भाग है। ऐसे में वर्षा जल का प्रभावी संचयन राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।हफीजुल हसन के अनुसार, राज्य में होने वाली करीब 80 प्रतिशत वर्षा का पानी बह जाता है। सरकार का लक्ष्य इस पानी को रोककर संरक्षित करना और वर्षभर उपयोग में लाना है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए वर्षा जल के अधिकतम संचयन की दिशा में काम किया जा रहा है।

सिंचाई क्षेत्र की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि झारखंड में करीब 24.25 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित किए जाने की संभावना है, जबकि अब तक लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षमता ही विकसित हो पाई है।उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस सिर्फ नई सिंचाई परियोजनाएं तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पहले से मौजूद सिंचाई संरचनाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता होगी।नहरों में पानी के परिवहन के दौरान होने वाले रिसाव को कम करने और खेतों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

झारखंड सरकार ने पटमदा-बोड़ाम और नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं के साथ-साथ पलामू के अमानत बराज के शेष कार्यों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया है।इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई है। राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से सिंचाई क्षमता के विस्तार के साथ किसानों को भी लाभ मिलेगा।सम्मेलन में जलाशयों की गाद निकासी, तालाबों और आहरों के जीर्णोद्धार को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई। इसके अलावा बाढ़ और सूखा प्रबंधन के लिए रियल-टाइम सूचना प्रणाली एवं फोरकास्टिंग विकसित करने पर जोर दिया गया।जल प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए AI (Artificial Intelligence) और Digital Twin जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि राज्यों के बीच जल प्रबंधन से जुड़े अनुभवों और तकनीकों का आदान-प्रदान देश की जल सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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