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नामकुम अंचल में जमीन के रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ और डबल म्यूटेशन के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जांच तेज कर दी है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज प्राथमिकी के तहत ACB टीम नामकुम अंचल कार्यालय पहुंची और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की। इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं।
ACB यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित जमीन का दूसरा म्यूटेशन किस प्रक्रिया के तहत हुआ और रिकॉर्ड में कथित बदलाव किस स्तर पर किया गया। इसके लिए संबंधित पंजी, राजस्व अभिलेख और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। तत्कालीन अंचल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
मामले में तत्कालीन CO श्वेता वर्मा, तत्कालीन अंचल निरीक्षक मनोज कुमार और दीपक कुमार आरोपी बनाए गए हैं। ACB ने केस नंबर 18/26 दर्ज किया है। एजेंसी पूर्व अधिकारियों-कर्मचारियों से पूछताछ के साथ जरूरी दस्तावेज जुटा रही है।
ACB तत्कालीन CO श्वेता वर्मा से पूछताछ की तैयारी में है। बताया गया है कि उनका मोबाइल बंद है और वह अपने ज्ञात ठिकाने पर नहीं मिली हैं। एजेंसी उनके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रही है।
1.22 एकड़ जमीन पर कथित गड़बड़ी
विवाद धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित खाता नंबर 32 के प्लॉट नंबर 776, 820, 821 और 822 से जुड़ा है। आरोप है कि रिकॉर्ड में बदलाव कर प्रथम प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम जमाबंदी कायम की गई। शिकायत में करीब 1.22 एकड़ जमीन के म्यूटेशन और डिमांड खोलने में भी अनियमितता का आरोप है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसकी मां ने अलग-अलग पंजीकृत विक्रय विलेखों से कुल 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी। उनकी मृत्यु के बाद पारिवारिक बंटवारे में शिकायतकर्ता ने खुद को वैध उत्तराधिकारी बताया।

2016 में डबल जमाबंदी का नोटिस
शिकायतकर्ता के मुताबिक, 17 अगस्त 2016 को उसे डबल जमाबंदी से संबंधित नोटिस मिला। अंचल कार्यालय से जानकारी लेने पर पता चला कि विवादित जमीन के एक हिस्से पर प्रथम प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम अलग जमाबंदी दर्ज है। इसके बाद मामला राजस्व अधिकारियों से होते हुए न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ACB ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है।
कंपनी निदेशक ने आरोपों से किया इनकार
कंपनी के निदेशक चंद्रप्रकाश धेलिया ने किसी भी अनियमितता से इनकार किया है। उनका कहना है कि कंपनी ने 2009 में वैध दस्तावेजों के आधार पर जमीन खरीदी, 2010 में बाउंड्री कराई और बाद में रजिस्ट्री पूरी हुई। उनके अनुसार, 2011-12 में म्यूटेशन कराया गया और 2021 तक ऑनलाइन लगान जमा किया जाता रहा।
धेलिया के मुताबिक, कोरोना काल में विपक्षी पक्ष ने एलआरडीसी के समक्ष मामला दर्ज कराया था। नोटिस नहीं मिलने के कारण म्यूटेशन रद्द हुआ, जिसके बाद कंपनी ने डीसी कोर्ट में अपील की। सुनवाई के बाद म्यूटेशन बरकरार रखने का आदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और कंपनी ACB जांच में पूरा सहयोग करेगी।