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झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच भाजपा नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पुलिस अधिकारी अनुराग गुप्ता की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। मरांडी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछा कि गंभीर आरोपों के बावजूद अनुराग गुप्ता के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
मरांडी ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि JSSC-CGL प्रकरण की जांच को प्रभावित करने, मामले को दूसरी दिशा में मोड़ने और कथित तौर पर डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट कराने में अनुराग गुप्ता की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
पेपर लीक के आरोपों को खारिज करने पर भी सवाल
भाजपा नेता ने यह भी पूछा कि आखिर ऐसी कौन-सी वजह थी जिसके चलते अनुराग गुप्ता छात्रों द्वारा परीक्षा में पेपर लीक के लगाए गए आरोपों को गलत साबित करने के प्रयास में सामने आए। मरांडी के मुताबिक, संबंधित अधिकारी ने मीडिया के सामने छात्रों के आरोपों को खारिज करने की कोशिश की थी।

उन्होंने कहा कि परीक्षा विवाद से जुड़े सवालों का जवाब राज्य के छात्र और बेरोजगार युवा जानना चाहते हैं। मरांडी ने इस पूरे घटनाक्रम को युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
CID जांच की निष्पक्षता पर उठाया सवाल
बाबूलाल मरांडी ने CID की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा किया। उनका तर्क है कि यदि किसी अधिकारी की भूमिका ही जांच को प्रभावित करने के आरोपों के घेरे में है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई किए बिना उसी जांच की निष्पक्षता पर भरोसा करना मुश्किल होगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच कराने की मांग की है, ताकि आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके।
आरोप सही मिले तो कार्रवाई की मांग
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुराग गुप्ता की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाए जाने की स्थिति में कानून के तहत सख्त कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं से जुड़े परीक्षा मामलों में जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है।
भाजपा नेता का कहना है कि यदि जांच में हस्तक्षेप या अनियमितता के आरोपों पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है, तो भविष्य में भी ऐसी घटनाओं की आशंका बनी रहेगी।