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देश में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को कई राज्यों में प्रदर्शन हुए, जबकि कुछ स्थानों पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
असम में विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत पार्टी के कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। वहीं पटना, चंडीगढ़ और कोलकाता में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यशैली और SIR की प्रक्रिया को लेकर विरोध जताया।
दिल्ली में चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ी
राजधानी दिल्ली में भी प्रदर्शन को देखते हुए चुनाव आयोग के कार्यालय और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। भारतीय युवा कांग्रेस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यहां प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।
मीडिया रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद
SIR को लेकर मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि में एक मीडिया रिपोर्ट है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि में SIR से संबंधित निर्णयों पर 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, कथित आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाने और नए नाम जोड़ने तथा चुनावी डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे। इन दावों के सामने आने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव सहित कई चुनावों में गड़बड़ी हुई और इसे लेकर उन्होंने अपनी बात को ‘100 प्रतिशत निश्चितता’ के साथ रखने की बात कही।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जो व्यक्ति मताधिकार पर हमला करता है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है और उसे ‘देशद्रोही’ बताया।
चुनाव आयोग ने असहमति की खबरों पर क्या कहा?
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर किसी गंभीर आंतरिक मतभेद के दावे को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अधिकारियों के बीच प्रशासनिक सुझाव, विचार-विमर्श और फीडबैक देना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR से संबंधित अंतिम निर्णय सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए हैं। इस तरह आयोग ने मीडिया रिपोर्ट में सामने आए कथित मतभेदों को निर्णय प्रक्रिया में बाधा के तौर पर स्वीकार नहीं किया है।
SIR को लेकर राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच जारी यह टकराव अब कई राज्यों तक पहुंच चुका है, जिससे चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर बहस और तेज हो गई है।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट