Tuesday, October 6, 2026
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तकनीक का ज्ञान ही काफी नहीं, मानवीय मूल्यों को भी अपनाएं युवा : राज्यपाल

by उर्वशी शेखर
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झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने युवाओं को तकनीकी शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया। सोमवार को आयोजित समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग किसी बड़े उद्देश्य की प्राप्ति और समाज की समस्याओं के समाधान के लिए किया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल नौकरी हासिल करने तक सीमित रहने के बजाय नए उद्यम और रोजगार के अवसर विकसित करने का आह्वान किया।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे बदलाव युवाओं के लिए नई संभावनाएं लेकर आए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। इन क्षेत्रों में तकनीकी विशेषज्ञों और नवाचार की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से पैदा हो रही चुनौतियों की ओर भी विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया। डेटा सुरक्षा, साइबर अपराध और डीपफेक जैसी समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक में दक्षता के साथ नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का होना भी आवश्यक है।

राज्यपाल ने कहा कि भविष्य में वही तकनीकी विशेषज्ञ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जो अपनी विशेषज्ञता का उपयोग जिम्मेदारी और विवेक के साथ करेंगे।

केवल नौकरी पाने की सोच से आगे बढ़ें विद्यार्थी

राज्यपाल ने तकनीकी शिक्षा को नवाचार और उद्यमिता का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों से निकलने वाले विद्यार्थियों को अपनी योग्यता का उपयोग नए अवसर पैदा करने में करना चाहिए। उनका लक्ष्य ऐसा होना चाहिए, जिससे वे स्वयं आगे बढ़ने के साथ दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के रास्ते खोल सकें।

उन्होंने विद्यार्थियों को समस्याओं के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। राज्यपाल के अनुसार, नई खोज की शुरुआत मौजूदा परिस्थितियों को बेहतर बनाने की इच्छा से होती है। इसलिए युवाओं को लगातार सवाल पूछने, नए प्रयोग करने और अलग-अलग संभावनाओं पर काम करने की आदत विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी समस्या का सामना होने पर उसके कारणों पर विचार करने के साथ समाधान तलाशना भी जरूरी है। इसी सोच से नए आविष्कार और तकनीकी उपलब्धियां संभव होती हैं।

झारखंड की स्थानीय समस्याओं का समाधान तलाशें तकनीकी संस्थान

राज्यपाल ने झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान को बढ़ावा देने की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि झारखंड में प्राकृतिक संपदा के साथ प्रतिभाशाली युवाओं की भी कमी नहीं है। इन दोनों का समुचित उपयोग राज्य के विकास को नई दिशा दे सकता है।

उन्होंने विश्वविद्यालय से जल संरक्षण, ऊर्जा, खनन, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में तकनीकी समाधान विकसित करने का आग्रह किया। विशेष रूप से जनजातीय इलाकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।

राज्यपाल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले अनुसंधान को आम लोगों के जीवन से जोड़ना आवश्यक है। प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक जब वास्तविक समस्याओं के समाधान में इस्तेमाल होती है, तभी उसका व्यापक सामाजिक लाभ सामने आता है।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने प्रधानमंत्री के विकसित भारत@2047 के संकल्प का उल्लेख करते हुए युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थी आने वाले दो दशकों में देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनकी प्रतिभा, रचनात्मक सोच और नए प्रयोग भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक हो सकते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी व्यक्तिगत सफलता के साथ देश और समाज की प्रगति को भी प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

शोध में असफलता मिले तो निराश होने के बजाय सीखें

अपने संबोधन में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को असफलताओं से सीखने का भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और वैज्ञानिक प्रयोगों में हमेशा अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते। ऐसे में निराश होने के बजाय कमियों को पहचानकर अगला प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने युवाओं को अपने प्रत्येक अनुभव का मूल्यांकन करने और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए लगातार सीखते रहने की सलाह दी।

राज्यपाल ने कहा कि बड़े सपनों को साकार करने के लिए मेहनत, अनुशासन और ज्ञान अर्जित करने की निरंतर इच्छा जरूरी है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वे अपने कौशल और प्रतिभा से झारखंड तथा देश के विकास में योगदान देंगे।

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