Thursday, October 8, 2026
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झारखंड में SEIAA का बड़ा एक्शन! हाई-टेक सिटी सेंटर मॉल के दावे खारिज, SAIL को मिली राहत

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (SEIAA) ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। प्राधिकरण ने पी एंड एम हाई-टेक सिटी सेंटर मॉल की ओर से पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास के नाम पर किए गए खर्च संबंधी दावों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। वहीं, धनबाद स्थित सेल की जितपुर भूमिगत कोयला खदान को पर्यावरणीय सुधार कार्य पूरे करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। टाटा स्टील की दो परियोजनाओं समेत कई अन्य प्रस्तावों को भी निर्धारित शर्तों के साथ टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) की स्वीकृति मिली है।

पी एंड एम हाई-टेक सिटी सेंटर मॉल के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ने 17 जुलाई 2026 को ई-मेल भेजकर पर्यावरणीय दायित्वों से जुड़े कुछ कार्यों को मान्यता नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताई थी। मॉल प्रबंधन का कहना था कि गौशाला के विकास और सामुदायिक कल्याण से संबंधित गतिविधियों पर किए गए खर्च को स्वीकार किया जाना चाहिए। प्राधिकरण ने इन आपत्तियों की विस्तार से समीक्षा की। इस दौरान मॉल प्रबंधन की ओर से जेवियर इंग्लिश स्कूल (विनीता भावे आश्रम) के निर्माण पर 1.31 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने के दावे की भी जांच की गई।

जांच में सामने आया कि जिस स्कूल भवन के निर्माण का खर्च मॉल प्रबंधन अपने पर्यावरणीय दायित्वों के तहत दिखा रहा था, उसका निर्माण परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने से काफी पहले हो चुका था। ऐसे में इस खर्च को संबंधित दायित्वों की पूर्ति के रूप में मान्यता नहीं दी गई। इसके अतिरिक्त, मॉल के पिछले हिस्से में स्थित फ्लाई ऐश और ठोस अपशिष्ट डंपिंग स्थल पर हरियाली विकसित करने के दावे के समर्थन में भी प्रबंधन पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया।

इन तथ्यों के आधार पर SEIAA ने राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (SEAC) की अनुशंसाओं से सहमति जताते हुए मॉल प्रबंधन की आपत्तियों को खारिज कर दिया। प्राधिकरण ने प्रस्तुत दावों को भ्रामक और पर्याप्त साक्ष्यों से रहित माना।

SAIL की जितपुर कोयला खदान को दो साल का अतिरिक्त समय

धनबाद स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की जितपुर भूमिगत कोयला खदान को पर्यावरणीय सुधार से जुड़े कार्य पूरे करने के लिए समयसीमा में विस्तार दिया गया है। प्राधिकरण ने खदान के रेमेडिएशन प्लान और प्राकृतिक एवं सामुदायिक संसाधन संवर्धन योजना को पूरा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 6 जून 2028 कर दी है।

हालांकि, इस राहत के साथ जवाबदेही भी तय की गई है। परियोजना प्रबंधन को अगले छह महीने के भीतर सुधारात्मक कार्यों में हुई प्रगति का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। इससे प्राधिकरण यह आकलन कर सकेगा कि निर्धारित पर्यावरणीय दायित्वों को पूरा करने की दिशा में कितनी प्रगति हुई है।

टाटा स्टील की दो बड़ी परियोजनाओं को ToR की मंजूरी

प्राधिकरण ने टाटा स्टील की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं के प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी है। धनबाद स्थित सिजुआ कोलियरी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रस्ताव को टर्म्स ऑफ रेफरेंस की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के निर्धारित सुरक्षा मानकों का सख्ती से अनुपालन करने की शर्त रखी गई है।

दूसरी ओर, सरायकेला-खरसावां जिले में प्रस्तावित टाटा स्टील के इलेक्ट्रिकल स्टील कॉम्प्लेक्स को भी ToR की स्वीकृति मिली है। इस औद्योगिक परियोजना की प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 0.5 मिलियन टन प्रति वर्ष है। ToR की मंजूरी परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे निर्माण या संचालन के लिए अंतिम पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं माना जाता।

गिरिडीह जिले के चक्रबरई स्टोन डिपॉजिट्स से संबंधित खनन प्रस्तावों पर भी प्राधिकरण ने निर्णय लिया है। इन परियोजनाओं को झारखंड हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के लागू प्रावधानों के अधीन टर्म्स ऑफ रेफरेंस प्रदान किया गया है। आगे की पर्यावरणीय मूल्यांकन प्रक्रिया में संबंधित नियमों और न्यायालय के निर्देशों का पालन करना होगा।

मॉल और आवासीय परियोजनाओं के लिए हरियाली और जल संरक्षण पर जोर

प्राधिकरण ने व्यावसायिक भवनों, शॉपिंग मॉल और आवासीय परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उपायों को प्राथमिकता दी है। आइकॉनिक मॉल सहित विभिन्न निर्माण परियोजनाओं के लिए कई आवश्यक शर्तें निर्धारित की गई हैं।

इनमें परियोजना क्षेत्र के कम से कम 15 प्रतिशत हिस्से में वृक्षारोपण, छतों पर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था और कार्बन फुटप्रिंट अध्ययन रिपोर्ट प्रस्तुत करने जैसी शर्तें शामिल हैं।

इसके अलावा, जैविक कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर (OWC) तथा दूषित जल के उपचार के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इन उपायों का उद्देश्य बड़ी निर्माण परियोजनाओं से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना और जल तथा हरित संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देना है।

सौर ऊर्जा से बिजली की खपत 20 प्रतिशत घटाने पर जोर

नई परियोजनाओं में ऊर्जा संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया गया है। प्राधिकरण ने पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए सौर ऊर्जा और पैसिव एनर्जी तकनीकों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं।

इसके तहत पारंपरिक ऊर्जा की खपत में 20 प्रतिशत तक कमी लाने पर जोर दिया गया है। भवनों के निर्माण और संचालन में ऊर्जा दक्ष तकनीकों के उपयोग से बिजली की मांग घटाने तथा पर्यावरणीय प्रभाव को सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है।

SEIAA के इन फैसलों से स्पष्ट है कि औद्योगिक और निर्माण परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय दायित्वों का दस्तावेजी प्रमाण महत्वपूर्ण रहेगा। जहां निर्धारित शर्तों के अधीन परियोजनाओं को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई है, वहीं अपर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर किए गए दावों को स्वीकार नहीं किया गया है।

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