केरेडारी थाना क्षेत्र में कोयला खनन और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पुलिस प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करने की पहल की है। पगार ओपी प्रभारी ने सीसीएल के चंद्रगुप्ता ओसीपी के परियोजना पदाधिकारी को पत्र भेजकर कोयला उठाव के लिए आने वाले सभी अधिकृत प्रतिनिधियों का पुलिस सत्यापन कराने का निर्देश दिया है।
पुलिस की ओर से जारी पत्र, ज्ञापांक 540/26, में कहा गया है कि पगार ओपी क्षेत्र में सीसीएल के एमडीओ सुशी इन्फ्रा के माध्यम से खनन कार्य संचालित है। वहीं, कोयले की ढुलाई विभिन्न निजी कंपनियों के जरिए की जा रही है। ऐसे में कोयला उठाव और परिवहन से जुड़े लोगों की लगातार आवाजाही को देखते हुए उनकी पहचान और पृष्ठभूमि की जांच को जरूरी बताया गया है।
संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण बढ़ाई गई सतर्कता
पुलिस प्रशासन ने केरेडारी क्षेत्र की संवेदनशील स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। क्षेत्र में पूर्व से उग्रवाद, नक्सली गतिविधियों और संगठित अपराध की घटनाओं का प्रभाव रहा है। कोयला कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों और अन्य कर्मियों की आवाजाही के बीच पुलिस किसी भी संदिग्ध गतिविधि की संभावना को रोकने के लिए पहले से सुरक्षा जांच सुनिश्चित करना चाहती है।

इसके तहत कोयला उठाव के लिए आने वाले प्रतिनिधियों की जानकारी संबंधित कंपनियों को पहले पुलिस के साथ साझा करनी होगी। उपलब्ध कराए गए विवरण के आधार पर पुलिस उनके बारे में सत्यापन करेगी।
वेरिफिकेशन के बाद ही मिलेगी उठाव की अनुमति
पुलिस ने सीसीएल प्रबंधन से कहा है कि सत्यापन पूरा होने के बाद ही संबंधित व्यक्ति को कोयला उठाव के लिए अधिकृत किया जाए। यानी पुलिस जांच के बिना किसी प्रतिनिधि को कोयला उठाव का परमिट या अनुमति नहीं दिए जाने की व्यवस्था की जा रही है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य कोयला उठाव की व्यवस्था में शामिल लोगों की पृष्ठभूमि की जानकारी पहले से हासिल करना और संदिग्ध या आपराधिक गतिविधियों से जुड़े व्यक्तियों की पहचान करना है। पुलिस का मानना है कि इससे कोयला खनन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ अवांछित तत्वों की गतिविधियों पर भी नजर रखने में मदद मिलेगी।
यदि सत्यापन के दौरान किसी व्यक्ति का आपराधिक इतिहास या असामाजिक तत्वों से संबंध सामने आता है, तो पुलिस उसके संबंध में आवश्यक कार्रवाई कर सकेगी। नई व्यवस्था के जरिए कोयला उठाव से जुड़ी गतिविधियों को सुरक्षा जांच के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है।