Table of Contents
झारखंड में ओबीसी आरक्षण और जनसंख्या के अनुपात में अधिकार व प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर मंगलवार को पांच जिलों में बुलाए गए बंद का व्यापक असर देखने को मिला। केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति के आह्वान पर रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और लोहरदगा में बंद समर्थक सड़कों पर उतरे। इनमें गुमला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां बाजार बंद रहे और कई प्रमुख सड़कों पर वाहनों की आवाजाही बाधित हुई।
गुमला में सुबह से ही प्रदर्शनकारियों ने अलग-अलग स्थानों पर मोर्चा संभाल लिया। टावर चौक, पटेल चौक और डुमरडीह चौक सहित कई इलाकों में सड़क पर बैठकर यातायात रोका गया। दुकानों के बंद रहने से बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम गतिविधि दिखाई दी। दवा दुकानों और जरूरी सेवाओं को इससे अलग रखा गया।
बंद का असर जिले से गुजरने वाले NH-43 और NH-143 पर भी पड़ा। कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। NH-43 झारखंड को छत्तीसगढ़ और आगे महाराष्ट्र से जोड़ता है, जबकि NH-143 के जरिए सिमडेगा होते हुए ओडिशा तक आवागमन होता है। इन प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने से यात्री और मालवाहक वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ी।
टावर चौक पर जाम, यात्रियों और स्कूली बच्चों की बढ़ी मुश्किलें
गुमला के टावर चौक पर प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क रोके जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। स्कूल जाने वाले बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा और कई बच्चे वैकल्पिक साधनों से अपने स्कूल पहुंचे। हालांकि, आंदोलनकारियों ने स्कूल बसों तथा आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को कई स्थानों पर रास्ता दिया।
बसों का परिचालन प्रभावित होने के कारण रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें भी बढ़ गईं। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, जिले से बड़ी संख्या में बसें प्रतिदिन विभिन्न रूटों पर चलती हैं, लेकिन बंद के कारण इनका परिचालन काफी हद तक ठप रहा।
प्रखंडों में भी प्रदर्शन, कई जगह टायर जलाकर विरोध
गुमला शहर के अलावा जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी बंद समर्थकों ने प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर सड़क पर टायर जलाकर यातायात बाधित किया गया। प्रदर्शनकारी समूह बनाकर प्रमुख मार्गों पर पहुंचे और लोगों से बंद में सहयोग की अपील करते रहे।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ आरक्षण तक सीमित नहीं है। वे सरकारी व्यवस्था, राजनीति और विकास योजनाओं में ओबीसी समाज की आबादी के अनुरूप भागीदारी चाहते हैं।
आरक्षण के साथ राजनीतिक हिस्सेदारी और PESA में अधिकार की मांग
केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति की ओर से सरकारी नौकरियों में ओबीसी आरक्षण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और PESA कानून के तहत अधिकार देने की मांग उठाई जा रही है। समिति का तर्क है कि जिस तरह सरकारी नीतियां और योजनाएं जनसंख्या को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं, उसी आधार पर ओबीसी समाज को भी उसके जनसंख्या अनुपात के अनुसार हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

आंदोलनकारियों ने आगामी जनगणना में ओबीसी के लिए अलग से कॉलम शामिल करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि ओबीसी आबादी का वास्तविक आंकड़ा सामने आने पर आरक्षण, सरकारी योजनाओं और प्रतिनिधित्व को अधिक प्रभावी ढंग से निर्धारित किया जा सकेगा।
सोमवार को मशाल जुलूस, आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी
बंद की तैयारी के तहत सोमवार शाम पांचों जिलों में कई स्थानों पर मशाल जुलूस निकाले गए थे। इसके जरिए लोगों से मंगलवार के आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई थी। समिति के नेताओं ने पहले ही संकेत दिया था कि मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होने पर आंदोलन का अगला चरण और व्यापक हो सकता है।
OBC नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना
गुमला में प्रदर्शन के दौरान ओबीसी नेता शिवदयाल गोप ने कहा कि समाज को मजबूरी में आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उनका दावा है कि पांचों जिलों में ओबीसी आबादी पर्याप्त होने के बावजूद सरकारी नौकरियों में समाज के युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने जनसंख्या के अनुपात में अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की।
ओबीसी नेता दिलीप नाथ साहू ने कहा कि संयुक्त बिहार के समय ओबीसी को आरक्षण का लाभ मिलता था, लेकिन झारखंड गठन के बाद स्थिति में बदलाव आया। उन्होंने आरोप लगाया कि ओबीसी समाज को राजनीतिक रूप से केवल वोट बैंक के तौर पर देखा गया और अब अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।
वहीं, ओबीसी युवा नेता कौशल साहू ने कहा कि बंद को मिल रहे समर्थन से पता चलता है कि समाज की मांगों को व्यापक स्तर पर समझा जा रहा है। उन्होंने इसे ओबीसी समाज के अधिकार और अस्तित्व से जुड़ा आंदोलन बताया। बंद समर्थकों ने आम लोगों को होने वाली परेशानी पर खेद जताते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए आंदोलन जरूरी हो गया है।
तोरपा में बाजार बंद, सड़कों पर कम रही आवाजाही
खूंटी जिले के तोरपा में भी बंद का असर साफ दिखाई दिया। अधिकांश दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। बाजारों में सामान्य दिनों की अपेक्षा गतिविधियां कम रहीं और सड़कों पर वाहनों की संख्या भी घट गई। बसों का परिचालन प्रभावित होने से यात्रियों और जरूरी काम से बाहर निकले लोगों को परेशानी हुई।
पांच जिलों में प्रशासन अलर्ट
रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और लोहरदगा में बंद को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई। संवेदनशील इलाकों में पुलिस की तैनाती और निगरानी बढ़ाई गई है। प्रशासन की प्राथमिकता किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना और आवश्यक सेवाओं को सुचारू रखना है।
केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति ने दोहराया है कि ओबीसी आरक्षण, राजनीतिक भागीदारी, जनगणना में अलग आंकड़ा और PESA के तहत अधिकार उनकी प्रमुख मांगें हैं। समिति ने कहा है कि मांगों पर ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा।