Tuesday, October 6, 2026
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तेतुलिया जमीन डील में नया खुलासा! IAS राजेश्वरी बी के पति ने कराई शैलेश सिंह की अग्रवाल बंधुओं से मुलाकात

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तेतुलिया वनभूमि घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को जमीन सौदे से जुड़े नेटवर्क में कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच के दौरान राजबीर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पुनित अग्रवाल से पूछताछ की गई। PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज उनके बयान में जमीन कारोबारी शैलेश कुमार सिंह और अग्रवाल परिवार के बीच संपर्क स्थापित होने की पूरी कड़ी सामने आई है।

पुनित अग्रवाल के अनुसार, वर्ष 2021 में IAS अधिकारी राजेश्वरी बी के पति सूरज ने शैलेश सिंह का परिचय उनके भाई विमल अग्रवाल से कराया था। उस समय राजेश्वरी बी दुमका की उपायुक्त थीं। परिचय के बाद जनवरी 2021 के अंतिम सप्ताह में विमल और पुनित अग्रवाल समेत अन्य लोग बोकारो पहुंचे। यहां शैलेश सिंह से मुलाकात के दौरान तेतुलिया मौजा की जमीन दिखाई गई और उससे संबंधित पावर ऑफ अटॉर्नी, अदालत के आदेश तथा अन्य दस्तावेज लिए गए।

ईडी के मुताबिक, शैलेश सिंह ने करीब 10 एकड़ जमीन को विकसित करने का प्रस्ताव राजबीर कंस्ट्रक्शन के सामने रखा था। शुरुआत में जमीन के विकसित हिस्से में 55 प्रतिशत हिस्सा राजबीर कंस्ट्रक्शन और 45 प्रतिशत हिस्सा शैलेश सिंह को देने पर चर्चा हुई। बाद में इस अनुपात को बदलकर 60:40 कर दिया गया। नए समझौते के अनुसार विकसित जमीन में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी राजबीर कंस्ट्रक्शन और 40 प्रतिशत शैलेश सिंह की होनी थी।

दो महीने में 3.40 करोड़ का भुगतान

जमीन के विकास को लेकर बातचीत के बाद राजबीर कंस्ट्रक्शन ने शैलेश सिंह के बेटे के नाम से संचालित उमायुष मल्टिकॉम प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते में रकम भेजनी शुरू की। ईडी के सामने दिए बयान के अनुसार, 8 फरवरी 2021 को 1.80 करोड़ रुपये, 10 फरवरी को 1.20 करोड़ रुपये, 4 मार्च को 30 लाख रुपये और 26 मार्च को 10 लाख रुपये का भुगतान किया गया।

इस तरह फरवरी और मार्च 2021 के दौरान कंपनी की ओर से उमायुष मल्टिकॉम को कुल 3.40 करोड़ रुपये दिए गए।

पुनित अग्रवाल ने ईडी को बताया कि शैलेश सिंह ने बातचीत के दौरान यह भी जानकारी दी थी कि अंबुजा ग्रुप तेतुलिया की जमीन के विकास में रुचि दिखा रहा है। उनके मुताबिक, तत्कालीन विधायक बिरंची नारायण की ओर से अंबुजा ग्रुप को पांच एकड़ जमीन देने के लिए दबाव बनाए जाने की बात भी शैलेश सिंह ने कही थी।

भुगतान के समय नहीं था कोई औपचारिक समझौता

ईडी की पूछताछ में पुनित अग्रवाल ने यह भी स्वीकार किया कि उमायुष मल्टिकॉम को भुगतान किए जाने के समय राजबीर कंस्ट्रक्शन और संबंधित पक्षों के बीच कोई औपचारिक एग्रीमेंट नहीं हुआ था। बाद में कंपनी के ऑडिट के दौरान ऑडिटर के दबाव के बाद जमीन के विकास को लेकर एक MOU तैयार किया गया।

इस दस्तावेज पर उमायुष मल्टिकॉम की ओर से ललन सिंह ने हस्ताक्षर किए थे। ईडी की जांच में ललन सिंह की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2021-22 में MOU पर हस्ताक्षर कराने के लिए ललन सिंह को राजबीर कंस्ट्रक्शन के रांची स्थित कार्यालय लाया गया था। शैलेश सिंह ने ललन सिंह को अपने बेटे की कंपनी में निदेशक बनाया था। हालांकि, जांच में सामने आया कि ललन सिंह का शैलेश सिंह के साथ कारोबारी रिश्ता पहले से नहीं था। वह कथित तौर पर शैलेश के यहां घरेलू कर्मचारी के रूप में काम करता था और खाना बनाने तथा कपड़े धोने जैसे काम करता था।

ईडी के अनुसार, घरेलू काम के एवज में ललन सिंह को पहले 10 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते थे। कंपनी में निदेशक बनाए जाने और संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के बाद उसका मासिक भुगतान बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दिया गया था। ईडी अब इन लेनदेन, जमीन के दस्तावेजों और संबंधित कंपनियों की भूमिका को तेतुलिया वनभूमि घोटाले की व्यापक जांच के हिस्से के रूप में देख रही है।

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