ओडिशा पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच तेज कर दी है। शुक्रवार को एजेंसी ने राज्य में नौ ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर की गई है, जिसमें 122 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें 100 से ज्यादा अभ्यर्थी हैं।
छापेमारी का फोकस कथित मास्टरमाइंड मुना मोहंती, सिलिकॉन टेकलैब के एमडी सुरेश नायक और पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज से जुड़े शंकर पृस्टी के परिसरों पर रहा। ED पेपर लीक से जुड़े पैसों के लेनदेन और उससे अर्जित संपत्ति की जानकारी जुटा रही है।
प्रिंटिंग प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ी
सीबीआई के मुताबिक, परीक्षा आयोजन का काम पहले ITI Ltd को और फिर सिलिकॉन टेकलैब तथा पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज को सौंपा गया था। आरोप है कि सितंबर 2025 में कोलकाता की सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस में प्रश्नपत्रों की गोपनीय प्रक्रिया का फायदा उठाकर उनकी प्रतियां तैयार की गईं और लीक का रास्ता बनाया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि पेपर उपलब्ध कराने के बदले अभ्यर्थियों से 20 से 25 लाख रुपये तक लिए गए। उन्हें तीन बसों से आंध्र प्रदेश के विजयनगरम ले जाकर कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्र के उत्तर याद कराए गए। एजेंटों ने उम्मीदवारों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक भी अपने पास रखे थे।
मामला उजागर होने के बाद पिछले साल अक्टूबर में होने वाली सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा रद्द कर दी गई थी। अब ED यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक से जुटाई गई रकम किन लोगों तक पहुंची और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।