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झारखंड के कोयला क्षेत्रों में चोरी, अवैध खनन और गैरकानूनी परिवहन पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) अपनी निगरानी व्यवस्था को और व्यापक करने जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को केवल कोयला परियोजनाओं तक सीमित रखने के बजाय अब खनिज संपदा की अवैध निकासी और उसके कारोबार से जुड़ी गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
CISF की प्रस्तावित रणनीति का मुख्य उद्देश्य कोयले के उत्पादन स्थल से लेकर उसके परिवहन तक होने वाले संभावित अवैध डायवर्जन को रोकना है। इसके लिए संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई जाएगी। जंगलों और ऐसे स्थानों पर भी विशेष नजर रखी जाएगी, जहां चोरी या अवैध खनन की आशंका अधिक रहती है।
स्निफर डॉग स्क्वॉड की भी होगी मदद
कोयला क्षेत्रों की निगरानी में प्रशिक्षित स्निफर डॉग स्क्वॉड की भूमिका भी बढ़ाई जाएगी। संभावित चोरी के मार्गों, जंगलों और संदिग्ध ठिकानों की जांच में इन दस्तों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और अन्य संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय को मजबूत करने की योजना है।
CISF की रणनीति में Mines and Minerals (Development and Regulation) Act यानी MMDR Act के प्रावधानों के प्रभावी पालन पर भी जोर दिया जा रहा है। अवैध खनन और कोयला चोरी से जुड़े मामलों में संबंधित एजेंसियों के साथ संयुक्त कार्रवाई और सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान पर फोकस रहेगा।

ड्रोन और GPS से रखी जाएगी नजर
सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ते हुए कोयला क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए निगरानी, वाहनों की GPS ट्रैकिंग और डेटा विश्लेषण का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तकनीकी माध्यमों को इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जोड़कर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
CISF अधिकारियों के मुताबिक, कोयला चोरी रोकने के लिए उन रास्तों और इलाकों की निगरानी विशेष रूप से बढ़ाई जाएगी, जिनका इस्तेमाल अवैध परिवहन के लिए किया जा सकता है। हाल में रांची में हुई समीक्षा बैठक में CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने अधिकारियों को कोयला चोरी रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
मगध-आम्रपाली परियोजनाओं पर विशेष नजर
झारखंड की मगध और आम्रपाली कोयला परियोजनाएं CISF की नई सुरक्षा रणनीति में प्रमुखता से शामिल हैं। इन परियोजनाओं में कोयले की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, आम्रपाली परियोजना में फिलहाल करीब 200 CISF जवानों की तैनाती की गई है। आने वाले समय में इस संख्या को बढ़ाकर लगभग 1,700 करने की योजना है। इससे परियोजना क्षेत्र, कोयला परिवहन और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कवच को और व्यापक किए जाने की उम्मीद है।