Wednesday, October 7, 2026
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जालसाजी के आरोपी बैंक अफसर को झटका, 10 लाख जमा करने की शर्त हटाने से HC का इनकार

by उर्वशी शेखर
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झारखंड हाईकोर्ट ने एसबीआई की रांची कॉमर्शियल ब्रांच के तत्कालीन अधिकारी मुरारी प्रसाद बर्णवाल को राहत देने से इनकार कर दिया है। बैंक जालसाजी के एक मामले में सीबीआई के आरोपी बर्णवाल ने अग्रिम जमानत के दौरान लगाई गई 10 लाख रुपये जमा करने की शर्त हटाने की मांग की थी। अदालत ने सुनवाई के बाद उनकी याचिका खारिज कर दी।

मामला उस समय का है, जब मुरारी प्रसाद बर्णवाल नवंबर 2003 से मई 2006 तक एसबीआई की रांची कॉमर्शियल ब्रांच में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। इसके बाद जून 2006 से अक्टूबर 2007 तक उन्होंने बोकारो की कॉमर्शियल ब्रांच में सेवाएं दीं।

सीबीआई के मामले के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान विवेक प्रताप सिंह की कंपनी मेसर्स रेणुकरा पॉलिसैक्स प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर नियमों के विपरीत ऋण स्वीकृत किया गया और बाद में उसकी क्रेडिट सीमा भी बढ़ाई गई। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में बैंक के कुछ अधिकारियों की भूमिका रही और कथित तौर पर सरकारी जमीन को भी जमानत के रूप में इस्तेमाल किया गया।

अग्रिम जमानत के लिए खुद स्वीकार की थी शर्त

मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद मुरारी बर्णवाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। अग्रिम जमानत पर सुनवाई के दौरान उन्होंने स्वयं अदालत के समक्ष यह सहमति दी थी कि वह 10 लाख रुपये सिविल कोर्ट के रजिस्ट्रार के पास जमा करेंगे।

हाईकोर्ट ने इस शर्त को स्वीकार करते हुए उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान की और रकम जमा करने के लिए चार महीने की समयसीमा निर्धारित की। हालांकि, वर्ष 2021 में दिए गए इस आदेश के बावजूद उन्होंने तय अवधि में न तो रकम जमा की और न ही अदालत के समक्ष सरेंडर किया।

समय बढ़ा, फिर भी नहीं जमा हुई रकम

इसके बाद वर्ष 2022 में बर्णवाल ने हाईकोर्ट में दोबारा याचिका दाखिल कर 10 लाख रुपये जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। अदालत ने उन्हें छह महीने की और मोहलत दी। इसके बावजूद निर्धारित अवधि में रकम जमा नहीं की गई और उन्होंने सरेंडर भी नहीं किया।

करीब चार वर्ष तक फरार रहने के बाद बर्णवाल ने वर्ष 2026 में हाईकोर्ट में फिर याचिका दायर की। इस बार उन्होंने 10 लाख रुपये सिविल कोर्ट में जमा करने संबंधी शर्त को ही समाप्त करने का अनुरोध किया।

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उनकी दलील स्वीकार नहीं की और 10 लाख रुपये जमा करने की शर्त हटाने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

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